• Tue. Aug 9th, 2022

प्रकृति के साथ नियम, नियंत्रण एवं संतुलन के साथ जीना ही पारलौकिक व्यवहार है- हिमांशु दूगड़

ByRameshwar Lal

Jun 6, 2021

सरदारशहर। इतिहास विभाग, उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान (मानित विश्वविद्यालय ),गांधी विद्या मंदिर एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली, प्रांत जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के उपलक्ष पर भारतीय संस्कृति में पर्यावरण की अवधारणा के अंतर्गत पंचतत्व पर आधारित प्रथम तत्व -पृथ्वी विषय पर आभासी माध्यम से पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में व्याख्यानमाला के निदेशक मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. अविनाश पारीक ने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। व्याख्यानमाला एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, जयपुर प्रांत के संयोजक एडवोकेट नितिन कासलीवाल ने व्याख्यानमाला के विषय की प्रस्तावना रखी एवं सफल संचालन किया। तकनीकी सत्र में मुख्य अतिथि गांधी विद्या मंदिर के अध्यक्ष हिमांशु दूगड़ ने अपने उद्बोधन में पृथ्वी तत्व का विश्लेषण करते हुए बताया कि पंचमहाभूत पर प्राचीन ऋषियों की खोज अभूतपूर्व थी।आयुर्वेद, वनस्पति विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान और विविध तकनीक आदि का अध्ययन विषय पृथ्वी ही रहा है। इसको सुप्त माना गया है। प्रकृति के साथ नियम, नियंत्रण एवं संतुलन के साथ जीना ही पारलौकिक व्यवहार है। आज धरती बीमार है वह कब तक मानव के रहने लायक रहेगी यह हमारे सामने यक्ष प्रश्न के रूप में है। व्याख्यानमाला के द्वितीय सत्र में शिक्षा निदेशालय, दिल्ली के शिक्षाविद एवं पर्यावरण प्रेमी संजयकुमार स्वामी ने धरती माता के गुणों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह हमारी सभी त्रुटियों को क्षमा करते हुए अपने हृदय पर धारण किए हुए हैं। आज मानव द्वारा सर्वाधिक दोहन धरती माता का किया जा रहा है। खनिज पदार्थ तथा रसायनों के माध्यम से धरती को खोखला कर दिया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास राजस्थान के क्षेत्रीय संरक्षक डॉ. दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने न्यास के विविध विषयों एवं कार्यों को बताते हुए वर्तमान में पृथ्वी मां की भूमिका को भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण तत्व बताया। प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने अतिथि वक्ताओं से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की। आयोजन संरक्षक आईएएसई (मानित विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो.देवेंद्र मोहन एवं गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद की पूर्व अधिष्ठाता प्रो. पुष्पा मोतियानी आदि का सानिध्य रहा। डॉ.मनमोहन सिंह, डॉ. हार्दिक पटेल एवं सुश्री दीपिका सिंह ने तकनीकी एवं सफल संचालन में सहयोग किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!