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चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहा बीदासर का राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र

ByMahesh Bhobharia

Jul 5, 2021
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उपखण्ड का सबसे बड़ा चिकित्सालय, फिर भी दूसरी जगहों पर जाने को मजबूर रोगी

1994 में उद्घाटन के बाद से ही कभी उपयोग में नहीं आया ऑपरेशन थिएटर

बीदासर 05 जुलाई। कस्बे का राजकीय गौवर्द्धन प्रसाद टांटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कहने को तो उपखण्ड का सबसे बड़ा स्वास्थ्य केन्द्र है परंतु चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहा है, जिसके कारण रोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि छोटी से छोटी बीमारी व पट्टी के लिए भी रोगियों को सुजानगढ़, बीकानेर, सीकर आदि स्थानों पर रैफर कर दिया जाता है। चिकित्सकों व कम्पाउण्डरों के काफी पद रिक्त पड़े हैं। जांचें व एक्स-रे आदि बाहर से करवाने पड़ते हैं। ईसीजी की सुविधा गत पांच वर्षों से नहीं है। कहने को तो 50 बैड का स्वास्थ्य केन्द्र है पर सुविधा 30 बैड की भी पूरी तरह से नहीं है। सबसे हैरान करने वाली व दुःखदायी बात तो यह है कि 10 जुलाई 1994 में इस स्वास्थ्य केन्द्र का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत ने किया था, तब से लेकर आज तक इसका ऑपरेशन थिएटर धूल फांक रहा है। एक दिन तो छोड़ एक घण्टे के लिए भी नहीं खुला है। आज करीब 28 वर्ष हो गये हैं। कई सरकारें आई और चली गई, विधायक और मंत्री आये और झांसा देकर चले गये। कस्बेवासियों ने अपने हक के लिए, वाजिब सुविधाओं के लिए संघर्ष भी किया, ज्ञापन भी दिए और यहां तक कि लम्बे-लम्बे आंदोलन भी किये पर कस्बेवासियों को चिकित्सकीय सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिला, केवल परेशानी के सिवाय। रोगियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। वैसे तो डिजिटल एक्स-रे मशीन की घोषणा कई बार हो चुकी है, पर अब वर्तमान नये नवेले विधायक द्वारा डिजिटल एक्स-रे मशीन शीघ्र दिलवाने की घोषणा की गई, सुनने में आया कि बजट भी पास हो गया है। पर अभी तक आई नहीं है। लोग इन्तजार कर रहे हैं, पर इन्तजार की घड़ियाँ लम्बी खिंचती जा रही है।

स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सकों के 11 पद सृजित है जिनमें से केवल 4 ही कार्यरत हैं, इसमें से भी दांतों के चिकित्सक को चूरू मेडिकल कॉलेज में डेप्यूटेशन पर लगा रखा है। नर्स ग्रेड द्वितीय के 15 पद सृजित हैं, जिनमें से 10 पद रिक्त पड़े हैं, सर्जन आधी बार अवकाश पर रहते हैं, इसके अलावा वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन, लैब टेक्नीशियन, लैब सहायक, वरिष्ठ सहायक के एक-एक पद, सहायक रेडियोग्राफर के दो पद, रेडियोग्राफर के 2 पद, चतुर्थ श्रेणी के 3 पद, सफाई कर्मचारी के 4 पद, डेन्टल टेक्नीशियन का एक पद, नेत्र सहायक का एक पद, फार्मासिस्ट का एक पद, कार्यालय अभिलेख सहायक के 3 पद व चालक का एक पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में रोगियों को सुविधाएं कैसे मिल सकती हैं। बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि सरकार, विभाग व प्रशासन इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि कस्बे के लोगों के स्वास्थ्य के साथ चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में खिलवाड़ हो रहा है।

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