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500 करोड़ की लागत से बन रही ‘ब्रह्मास्त्र’ धर्मा प्रोडक्शन की सबसे बड़ी फिल्म, टेक्नोलॉजी और वीएफएक्स इस फिल्म की जान हैं

ByRameshwar Lal

Jul 3, 2021
  • अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, नागार्जुन जैसे सुपर सितारे फिल्म की हाईलाइट
  • करण जौहर की 1100 करोड़ से भी ज्यादा की 7 फिल्में फंसीं

बॉलीवुड में कहीं भी, कभी भी ‘ब्रह्मास्त्र’ फिल्म का जिक्र होता है तो एक जम्हाई जरूर निकल जाती है। चार साल पहले 2017 में यह फिल्म अनाउंस हुई थी। तब माना जा रहा था कि अगस्त 2019 में फिल्म रिलीज हो जाएगी। अब तो यह फिल्म 2021 खत्म होते-होते भी आएगी या नहीं, यह कोई नहीं बता पा रहा है, मगर दावे के मुताबिक चाहे कितनी देर हो जाए, यह Sci-Fi फिल्म वीएफएक्स समेत टेक्नोलॉजी के प्रयोग से अनूठी बनी है। यह हिंदी सिनेमा के लिए एक माइलस्टोन साबित होगी।

वैसे यह फिल्म आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की रिलेशनशिप का एक माइलस्टोन तो बन ही चुकी है। ‘ब्रह्मास्त्र’ पहले रिलीज होगी या रणबीर-आलिया की शादी पहले होगी, यह भी बॉलीवुड में एक आम चर्चा का विषय है।

प्रोड्यूसर करण जौहर ने फिलहाल जलियांवाला बाग पर ‘दी अनटोल्ड स्टोरी ऑफ सी. शंकरन नायर’ फिल्म बनाने का ऐलान किया है। धर्मा प्रोडक्शन की 7 फिल्में पाइपलाइन में हैं। इन सारी फिल्मों में धर्मा का 1100 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट है। इसमें सबसे अहम ‘ब्रह्मास्त्र’ है, जिसकी लागत करीब 500 करोड़ रुपए है।

बड़े स्टार, लेकिन यह फिल्म टेक्नोलॉजी के नाम

‘ब्रह्मास्त्र’ की कास्ट में रणबीर, आलिया और अमिताभ बच्चन और नागार्जुन हैं। ओटीटी के हीरो कहे जाने वाले दिव्येंदु शर्मा भी इस फिल्म में हैं। धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म है। वेकअप सिड और ये जवानी है दीवानी जैसी फिल्म बना चुके अयान मुखर्जी इस फिल्म के डायरेक्टर हैं।

मगर, फिल्म के बारे में जानने वाले सूत्र बताते हैं कि यह फिल्म अपनी कास्ट के लिए नहीं, टेक्नोलॉजी के लिए जानी जाएगी। वीएफएक्स का ऐसा इस्तेमाल बीते सालों में किसी फिल्म में नहीं हुआ। बाहुबली तो इसके सामने एक औसत फिल्म ही लगेगी, ऐसा भी दावा हो रहा है।

ब्रह्मास्त्र का लोगो 2019 में इलाहाबाद में अर्द्ध कुंभ के दौरान संगम तट पर लॉन्च किया गया था। जिसमें रणबीर कपूर और आलिया भट्ट सहित फिल्म से जुड़े कई लोग पहुंचे थे।

सुपर-नैचुरल पॉवर्स की Sci-Fi स्टोरी

इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ‘ब्रह्मा’ हैं। जाहिर है कि उनके पास सुपरनैचुरल पॉवर है। रणबीर अपना घर छोड़कर सुपरनैचुरल पॉवर्स की खोज में जाते है। यहां हर किरदार शक्तिशाली है। फिल्म के स्टंट और स्पेशल इफेक्ट्स देखकर दर्शक दांतों तले उंगलियां दबाने लगेंगे।

फिल्म में सभी किरदार ब्रह्मास्त्र हासिल करने की कोशिश करते हैं जो कि टूट चुका है और उसके टुकड़े पूरी दुनिया में गिरे हैं। अपनी-अपनी शक्तियों से सभी उसकी तलाश में जुट जाते हैं।

अपने हाथों से आग बरसातीं आलिया भट्ट से लेकर सारे किरदार यही सब करते स्लैपस्टिक ना लगें, इसलिए सबको खास तरीके से ट्रेनिंग दी गई है।

फिल्म के वीएफएक्स के बारे में जानने वाले लोगों का दावा है कि बीते सालों में ऐसी फिल्म भारत के दर्शकों ने नहीं देखी होगी। आने वाले कुछ सालों में शायद ऐसी फिल्म बनाने का साहस भी कोई नहीं करेगा। इसमें टेक्नोलॉजी के समुचित प्रयोग के लिए क्रू में बहुत सारे फॉरेन टेक्नीशियंस की मदद ली गई है।

‘अवतार’ समेत हॉलीवुड की कुछ स्पेशल इफेक्ट्स पर आधारित फिल्मों से जुड़े एक्सपर्ट ने भी इस फिल्म में काम किया है।

टेक्नोलॉजी और देरी ने बढ़ाया फिल्म का बजट

इंडस्ट्री से जुड़े लोग बताते हैं कि रणबीर कपूर की एक फिल्म की फीस 20 करोड़ के आसपास है। रणबीर ‘ब्रह्मास्त्र’ में एक प्रोड्यूसर भी हैं। आलिया को ‘राजी’ के लिए 10 करोड़ की फीस मिली थी। जाहिर है इस फिल्म के लिए उन्हें ज्यादा फीस मिली होगी। अमिताभ की फीस उनका किरदार कितना है, इसके हिसाब से 20 से 40 करोड़ तक हो सकती है।

मगर, इस फिल्म का बजट 500 करोड़ के करीब है। मतलब कि इसी कास्ट के साथ अगर एक नॉर्मल फिल्म बनाई जाती तो शायद बजट 150 करोड़ के आसपास हो सकता था, लेकिन यहां सबसे ज्यादा खर्च टेक्नोलॉजी पर हो रहा है। फिल्म में फॉरेन क्रू की भरमार है। उन सबकी फीस और फॉरेन लोकेशन के खर्चे और साथ में कोरोना ने फिल्म की लागत बढ़ा दी है ।

पहले भाग का यह हाल तो तीन भाग कब बनेंगे?

यह फिल्म ट्रियोलॉजी है। मतलब, फिल्म के तीन भाग हैं। पहला भाग पूरी तरह से रणबीर कपूर पर फोकस है। रणबीर ब्रह्मास्त्र पाने के लिए 4000 साल पीछे के युग में जाते हैं, जो महाभारत काल के आसपास का समय है। टाइम ट्रेवल की कहानी कहती फिल्म की मेकिंग ही लंबा टाइम ट्रेवल कर रही है। पहले भाग में इतना समय लगा तो बाकी के तीन भाग कब तक बन पाएंगे, यह पता नहीं।

ट्रायोलॉजी और सीक्वल में अंतर

किसी फिल्म का सीक्वल या फ्रेंचाइजी वह होती है, जिसमें एक ही टाइटल और थीम पर फिल्में बनती हैं। जैसे- मर्डर, गोलमाल, हंगामा और बागी जैसी फिल्में आई हैं। यहां ज्यादातर फिल्मों में पहली फिल्म सुपरहिट हुई, उसके बाद उसी थीम पर दूसरी या तीसरी फिल्म बनी। ओरिजिनल फिल्म बनाते वक्त सीक्वल का प्लान नहीं था।

जबकि ‘बाहुबली’ के पहले भाग ्के प्लान के वक्त ही पता था कि दूसरा भाग जरूर बनाया जाएगा। ‘धूम’ और ‘कृष’ जैसी फिल्में पारिभाषिक तौर पर ट्रायोलॉजी मानी जाएं या नहीं, यह एक सवाल है। ‘ब्रह्मास्त्र’ के बारे में शुरुआत से ही यह प्लान है कि यह फिल्म तीन भाग में आएगी।

इससे पहले दीपा मेहता ने पांच मूल तत्व पर आधारित ट्रायोलॉजी ‘फायर’, ‘अर्थ’ और ‘वाटर’ बनाई थी। इन सारी फिल्मों ने बहुत सराहना पाई थी।

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