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विद्या बालन बोलीं- मौका मिला तो मैं स्क्रीन पर चार्ली चैपलिन का रोल निभाना चाहूंगी

ByRameshwar Lal

Jul 23, 2021

‘कहानी’, ‘डर्टी पिक्चर’, ‘इश्किया’ और ‘पा’ जैसी फिल्मों में संजीदा किरदार निभा चुकीं एक्ट्रेस विद्या बालन कॉमिक हॉलीवुड एक्टर चार्ली चैपलिन का किरदार निभाने की इच्छुक हैं। हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान, अभिनेत्री ने कहा कि यदि उन्हें कभी अपने करियर में चार्ली चैपलिन का रोल ऑफर होता है, तो वो बेझिझक उसके लिए हामी भर देंगी। बातचीत के दौरान, विद्या ने अपनी अपकमिंग शार्ट फिल्म ‘नटखट’ के बारे में भी बताया जो जेंडर इक्वलिटी पर आधारित है।

विद्या हैं चार्ली चैपलिन की बहुत बड़ी फैन

विद्या स्क्रीन पर चार्ली चैपलिन का किरदार निभाने पर कहती हैं, “मौका मिला तो मैं स्क्रीन पर चार्ली चैपलिन का रोल निभाना चाहती हूं, यूं कहें तो मेरा ये ड्रीम रोल होगा। मुझे वो बहुत पसंद हैं, उन्होंने अपनी हर भूमिका को काफी बहखूबी से निभाया है। सच कहूं तो मैं नहीं जानती कि मैं उनका किरदार स्क्रीन पर कैसे निभा पाऊंगी, लेकिन हां, यदि कोई किसी फिल्म में मुझे चार्ली चैपलिन का रोल ऑफर करे तो मैं उसे ज़रूर हामी भर दूंगी। मैं उनकी बहुत बड़ी फैन हूं। खुद को उनके रूप में देखकर मजा आ जाएगा।”

विद्या बालन को पसंद है थ्रिलर और ड्रामा से भरी फिल्में

विद्या बालन पर्सनली थ्रिलर मूवी की बहुत शौकीन हैं। इस बारे में वो कहती हैं, “मुझे थ्रिलर मूवीज देखना बहुत पसंद है, क्योंकि कहीं-न-कहीं उसमे हर तरह के एंगल नजर आते हैं- ड्रामा, रोमांस आदि। जो फिल्म आपको अंत तक बांधकर रखे, वो देखने का मजा ही कुछ और है। ज्यादातर थ्रिलर मूवी में ही ऐसा कुछ नजर आता है। कभी कभार मैं कॉमेडी फिल्में भी देख लेती हुं, लेकिन थ्रिलर और ड्रामा से भरी फिल्मों की बात ही अलग होती है।”

विद्या ने की अपनी शार्ट फिल्म ‘नटखट’ के बारे में बात

विद्या की अपकमिंग शार्ट फिल्म ‘नटखट’ जल्द ही डिजिटल प्लेटफार्म पर रिलीज हो रही है, जो कि जेंडर इक्वलिटी पर आधारित है। इल पर अभिनेत्री कहती हैं, “जब डायरेक्टर शान व्यास मेरे पास इसकी स्क्रिप्ट लेकर आए तो मेरा पहला रिएक्शन ये था कि इतनी बड़ी कहानी आप इतने कम समय में कैसे दिखा सकते हैं। जब ये फिल्म खत्म हुई तो एहसास हुआ कि अच्छा हुआ ये एक शार्ट फिल्म है, क्योंकि ये कहानी आपको आधे घंटे में ही झिंझोड़ देगी। यदि ये आम फिल्मों की तरह दो घंटे तक चली तो फिर ऑडियंस के लिए इसे एक्सेप्ट करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। जेंडर इक्वलिटी के बारे में हम सिर्फ बोलते रहते हैं, हम सिर्फ बात करते हैं कि कब औरत और आदमी को एक सामान दर्जा दिया जाएगा, लेकिन ज्यादा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। इस फिल्म के जरिये हमने बताने की कोशिश की है कि सही परवरिश कितनी जरूरी है। मुझे गर्व है कि मैं इस तरह के प्रोजेक्ट से जुड़ी हूं।”

विद्या के लिए मायने रखती है फिल्म की कहानी और किरदार

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में विद्या ने अपना एक अलग मुकाम हासिल किया है। ऐसे में जाहिर है लोगों की उम्मीदें भी उनसे काफी होती हैं। तो क्या विद्या को इन उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रेशर होता है? इस पर वे कहती हैं, “सच कहूं तो मैं किसी की उम्मीदों को ध्यान में रखकर कोई फैसला नहीं करती। लोगों को अच्छा लगेगा, ये सोचकर मैं कोई फिल्म साइन नहीं करती हूं। मेरे लिए मायने रखती है फिल्म की कहानी और किरदार। हां, इस बात से इंकार नहीं करुंगी कि ऑडियंस की उम्मीदें मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ाती हैं। जब कोई मुझसे पूंछता है कि इस बार आप क्या लेकर आ रही हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है, मेरा हौसला बढ़ता है।”

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