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ईरान में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आए:कट्‌टरपंथी इब्राहिम रईसी बने ईरान के आठवें राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस भी रह चुके.

ByRameshwar Lal

Jun 19, 2021

ईरान में शुक्रवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे शनिवार को आए। कट्‌टरपंथी माने जाने वाले इब्राहिम रईसी (60) चुनाव जीत गए हैं। रईसी वर्तमान में ईरान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस हैं। रईसी के अलावा चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों ने उन्हें जीत की बधाई दी है।

इब्राहिम रईसी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खुमैनी का समर्थन प्राप्त है। चुनाव से पहले खुमैनी ने कहा था- ‘अब हम पूर्व को प्राथमिकता देंगे।’ जबकि पारंपरिक तौर पर ईरान की विदेश नीति ‘न पूर्व और न पश्चिम’ की रही है।

ईरान में 1988 में 5 हजार राजनीतिक कैदियों को सामूहिक फांसी दी गई थी। माना जाता है कि इस सामूहिक फांसी में रईसी की भूमिका रही थी। हालांकि, रईसी इस मामले में बयान देने से बचते रहे हैं। अमेरिका ने भी इस मामले में रईसी की निंदा की थी।

शुक्रवार को हुए मतदान में शाम 5 बजे तक 23% यानी 1.4 करोड़ लोगों ने वोट किया था। ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में इस बार 4 उम्मीदवार मैदान में थे। चुनाव से पहले खमेनी के नेतृत्व वाले गार्जियन काउंसिल ने सैकड़ों नेताओं को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दे दिया था।

ये नेता मौजूदा राष्ट्रपति हसन रूहानी के समर्थक थे। इसलिए रईसी को चुनौती देने वाला कोई नहीं बचा। चुनाव में 42 साल बाद सबसे कम मतदान हुआ। इसे पहले 2017 के चुनाव में 73% वोटिंग हुई थी। ईरान में 6 करोड़ से ज्यादा वोटर्स हैं।

ये 4 उम्मीदवार थे मैदान में

  • इब्राहिम रईसी : 60 साल उम्र है। चीफ जस्टिस रहे हैं।
  • मोहसिन रेजाई : 66 साल के हैं। सेना के पूर्व कमांडर इन चीफ रहे हैं।
  • अब्दुल नसीर हेम्मती : 64 साल के हैं। सेंट्रल बैंक के पूर्व चीफ रह चुके हैं।
  • आमिर हुसैन हाशमी : 50 साल उम्र है। संसद के डिप्टी स्पीकर

किन मुद्दों पर हुए चुनाव?

  • अर्थव्यवस्था : 2015 में ओबामा के दौर में अमेरिका से न्यूक्लियर प्रोग्राम पर डील हुई। 2018 में ट्रम्प ने इसे रद्द कर दिया। ईरान की इकोनॉमी चरमरा गई।
  • बेरोजगारी : पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मुल्क में 24% युवा बेरोजगार हैं। प्रतिबंधों के चलते वे दूसरे देशों में नहीं जा पाते।
  • लोकतंत्र : ईरान में सही मायनो में लोकतंत्र नहीं है। राष्ट्रपति भी गार्जियन काउंसिल की ही बात मानता है। ज्यादातर मामले सर्वोच्च धर्मगुरु तय करता है।
  • कोरोना : 3 करोड़ से ज्यादा मामले दर्ज, करीब 83 हजार संक्रमितों की मौत। देश में बनी वैक्सीन तैयार, लेकिन लोग वैक्सीनेशन के लिए ज्यादा तैयार नहीं।
  • डिप्लोमेसी : किसी भी पड़ोसी देश से अच्छे रिश्ते नहीं। यही वजह है कि ईरान दुनिया में अलग-थलग पड़ा।
  • आतंकवाद : फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास को मदद देने का आरोप। इसीलिए हमेशा इजराइल और अमेरिका के निशाने पर।
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