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तालिबान की ताकत और बढ़ी:अफगानिस्तान के एक और इलाके पर कब्जा किया, अब इस आतंकी संगठन के हाथ में यहां के 50 से ज्यादा जिलों का कंट्रोल

ByRameshwar Lal

Jul 5, 2021

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी हो रही है। इसके साथ-साथ आतंकी संगठन तालिबान यहां एक-एक जिलों पर अपना कब्जा जमाता जा रहा है। रविवार को उसने अफगान सेना के साथ चले जबर्दस्त संघर्ष में कंधार के पंजवाई जिले को कब्जे में ले लिया। यह तालिबान का पुराना गढ़ रहा है। पाकिस्तान के जियो न्यूज ने अफगानिस्तान के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है।

मई की शुरुआत में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी शुरू हुई थी। तभी से तालिबान ग्रामीण इलाकों पर कब्जा जमाने में लग गया था। वह अब तक 50 से ज्यादा जिलों को अपने कंट्रोल में ले चुका है।

नाटो सेनाओं ने सामरिक महत्व का बगराम एयरबेस भी छोड़ा
अमेरिका की अगुआई वाली नाटो सेना ने दो दिन पहले ही काबुल के पास स्थित बगराम एयर बेस खाली किया है। वह यहीं से तालिबान और उनकी मदद करने वाले अलकायदा के खिलाफ 20 साल से ज्यादा समय से अभियान चलाती रही। फिलहाल यह एयरबेस अफगान सेनाओं के नियंत्रण में है। इस अहम ठिकाने से नाटो सेनाओं की वापसी के बाद अफगानिस्तान सरकार को चिंता है कि तालिबान नए इलाकों को अपने कब्जे में ले सकता है।

तालिबान के लिए पंजवाई अहम क्यों है?
पंजवाई जिला कंधार शहर के करीब है। कंधार में ही तालिबान की स्थापना हुई। यह उसका गढ़ है, ऐसे में पंजवाई पर कब्जे से उसकी ताकत बढ़ी है। इससे अफगान सेनाओं के खिलाफ उसकी लड़ाई और आसान हो सकती है।

भारत की तालिबान नेताओं से चर्चा होने की खबरें
बीते दिनों ये खबरें आईं कि भारत इस वक्त तालिबान के संपर्क में है। कतर की राजधानी दोहा में भारतीय अफसरों और तालिबानी नेताओं के बीच बातचीत हुई है। कतर के चीफ निगोशिएटर मुतलाक बिन मजीद अल कहतानी ने इसकी पुष्टि कर दी है। उन्होंने कहा, ‘तालिबान से बातचीत के लिए भारतीय अधिकारियों ने दोहा का दौरा किया है। हर किसी को लगता है कि तालिबान भ‌विष्य में अफगानिस्तान में बड़ा रोल प्ले करने वाला है। इसलिए हर कोई उससे बातचीत करना चाहता है। भारत ने अफगानिस्तान की बहुत मदद की है और वह वहां अमन और स्थिरता चाहता है।’

भारत तालिबान से बात क्यों कर रहा है?
डिफेंस और स्ट्रैटजिक एक्सपर्ट सुशांत सरीन का कहना है कि इस तरह के संपर्क तो किसी न किसी स्तर पर पहले भी थे और होने भी चाहिए। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि ये कितने कारगर साबित होते हैं। 1990 के आसपास तो तालिबान ने खुद भारत से संपर्क किया था। खुफिया स्तर पर तो संपर्क जरूर रहा होगा। हां, ऑफिशियली इसे कन्फर्म नहीं किया जाता। फिलहाल, जो कुछ सामने आ रहा है, ये शायद पहली बार ही हो रहा है।

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