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राजस्थान के 6 जिलों से मौसम पर रिपोर्ट पहली बार हीट वेव से मौतें नहीं, आबू में जून में बादल

ByRameshwar Lal

Jun 25, 2021

एमबीएम इंजीनियरिंग काॅलेज से 1976 के स्नातक इंजीनियर सज्जनकुमार कई दशक से जलवायु परिवर्तन के वैश्विक अध्ययन से जुड़े हैं। वे बताते हैं- क्लाइमेट चेंज दुनिया में कहर बरपा रहा है। उसके नुकसान हो रहे हैं; लेकिन पश्चिमी राजस्थान को बहुत फायदे हुए। लू के तेवर बहुत कम हैं। बारिश बढ़ी है। आमतौर पर 50 डिग्री रहने वाला पारा 48 डिग्री भी नहीं पहुंचा। लू से कोई मौत नहीं हुई।

बाड़मेर के कई गांवों में पहले लू के कारण कई युवक कुंआरे रह जाते थे। लोग इस तरफ बेटियां नहीं देते थे। अभी हम जिस गांव में हैं, वहां 42 और 48 साल के दो ही कुंआरे हैं। अब तो ये दो ही हैं, लेकिन पहले तो ऐसे आठ-दस लोग जिले के हर गांव में मिल जाते थे। प्रसिद्ध साहित्यकार नंदकिशोर आचार्य बीकानेर में अपने घर पर हैं।

बताते हैं, अब पहले जैसी काली-पीली आंधियां नहीं आतीं। कभी 7-7 दिन ये आंधियां आती थीं। हर समय खंख (धूल भरी आंधी) चढ़ी रहती थी। खाने-पीने में रेत रहती थी। अब लू पहले जैसी मारक नहीं। मई-जून में भी रातें इतनी ठंडी होती थीं कि अल-सुबह खेसले ओढ़ने पड़ते थे, लेकिन अब रातें गरम हैं।

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