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मानसरोवर नगर निगम : स्टिंग में पकड़े गए भ्रष्टाचारी

ByRameshwar Lal

Jul 10, 2021

राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम रोजाना रिश्वत लेते हुए भ्रष्टाचारियों को दबोच रही है। हाल ही में बड़े स्तर पर कई अफसरों पर कार्रवाई हुई है। कलेक्टर एसपी, एसडीएम सहित कई अफसर पकड़े गए हैं। उधर, एक्सईएन, पुलिस इंस्पेक्टर व डीटीओ की आय से अधिक संपत्ति मामले में पकड़े हैं। हर दिन हो रही बड़े पैमाने में कार्रवाई के बावजूद भी भ्रष्टारियों के हौसले बुलंद हैं। जयपुर के मानसरोवर नगर निगम के कार्यालय में लोग इधर-उधर घूमते रहते हैं, लेकिन बिना रुपए दिए काम नहीं होता। कई एजेंट सक्रिय हो चुके हैं, ये साफ कहते हैं कि फास्ट काम कराना है तो पैसे देने होंगे आखिर उन्हें सैलरी मिलती ही कितनी है।टीम ने एक वीडियो स्टिंग किया, इसमें यह खुलासा हुआ। नगर निगम पहुंची तो सामने आया कि कर्मचारियों ने रिश्वत के लिए दलालों को बैठा रखा है।

7 दिन तक टीम ने मानसरोवर नगर निगम का रियलिटी चेक किया तो चौंकाने वाला मामला सामने आया।यहां भी दलालों के माध्यम से रिश्वत लेने का बड़ा खेल चल रहा है। इसके लिए इन्होंने पूरा जाल बिछा रखा है। यहां ऐसा कोई काम नहीं जो बिना रुपए नहीं होता है। इन दलालों से जब बात की तो बताया कि 8 हजार जैसी सैलरी में पेट्रोल का खर्चा तक नहीं निकलता। कैमरे पर एक दलाल ने कबूल भी किया कि यहां एक कर्मचारी रोज 500 से 700 रुपए लेकर जाता है। इस पर टीम ने नगर निगम मानसरोवर में एक स्टिंग ऑपरेशन किया।टीम एक बर्थ सर्टिफिकेट को बनवाने के लिए पहुंची। काउंटर पर सारे दस्तावेज दिए तो तीन दिन बाद प्रमाणपत्र ले जाने की बात कहीं। टीम ने मजबूरी बताते हुए उनसे जल्दी देने को कहा। काउंटर कर्मचारी ने तीन दिन के बाद ही आने की बात कहीं। पास में ही एक युवक ने पीछे बने काउंटर पर संपर्क करने की बात कही। वहां ई-मित्र से जल्दी प्रमाण पत्र बनवाने की बात हुई। हैरानी की बात है कि दलाल देने कहा पैसे दो, दौ सौ रुपए लेने के बाद काउंटर से एक घंटे के बाद प्रमाणपत्र दे दिया गया।

टीम नगर निगम मानसरोवर में एक जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंची। पहले काउंटर से फॉर्म लिया। कुछ देर के बाद फाॅर्म भरकर दस्तावेज फोटो कॉपी करवाकर जमा करवाए। काउंटर पर बैठे युवक ने पूरा रिकाॅर्ड चैक किया। अस्पताल का रिकॉर्ड मिलाकर वापस दूसरे काउंटर पर जाने को बोला। दूसरे काउंटर पर टीम ने जाकर फाॅर्म दे दिया। वहां पर युवक ने रजिस्टर में एंट्री की। फिर उसने 25 रुपए मांगे। रसीद काटने के बाद उसने तीन दिन बाद प्रमाण पत्र लेकर जाने की बात कहीं। उसे जरूरी काम से दिल्ली जाने की बात बोलकर जल्दी बनाने को बोला। उसने कहा कि कोई भी आकर ले जा सकता है। वहां पर कुछ देर रुके तो एक युवक ने पीछे संपर्क करने की बात कहीं।

नगर निगम के ऑफिस में ही एक ई-मित्र केंद्र बना हुआ है। टीम वहां पर पहुंची तो एक युवक बैठा मिला। उससे मजबूरी बताकर प्रमाणपत्र जल्दी बनवाने की बात कही। उसने पूछा कि अभी लेना है, उसे टीम ने हां बोला। वह उठकर तुरंत अंदर ऑफिस में चला गया। वहां से कुछ देर के बाद वापस आया और बोला कि काम हो जाएगा। अभी लंच चल रहा है, इसके बाद बनवा दूंगा। आप कुछ देर बैठकर इंतजार कर लो।

नगर निगम में स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ। ई-मित्र में पीछे बैठे युवक ने बताया कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी ज्यादा नहीं है। किसी की 8 हजार रुपए है तो कोई 5 हजार रुपए में ही काम कर रहा है। ठेकेदार इतने ही रुपए देता है। जब उससे पूछा इतने रुपए में ये घर कैसे चलाते हैं। तो बोला कि ऊपर से कमा लेते हैं। उससे खुलकर बात की तो बोला कि हर एक कर्मचारी 12 से 15 हजार रुपए कमा लेता है। वह बोला कि ऐसे तो पेट्रोल का खर्चा ही नहीं निकलता है। हर कर्मचारी रोजाना पांच सौ से ज्यादा रुपए ले जाते हैं। इसको जल्दी काम करवाना है तो वह रुपए देकर जाता है।थोड़ी देर के बाद वह दोबारा से अंदर गया। बात करके वापस आया और कहा कि दौ सौ रुपए लगेंगे। बन जाएगा। काफी देर के बाद उसने बाहर की खिड़की पर जाकर पूछताछ की। तब उसे अंदर से युवक ने कहा कि प्रमाणपत्र बन गया है। अभी थोड़ी देर रुको मैं आ रहा हूं।कुछ देर के बाद अंदर से एक कर्मचारी पीछे की ओर बाहर निकल आया। टीम अंदर ही बैठी हुई थी। उसने आवाज लगाई तो युवक तुरंत भाग कर पहुंचा। उसने कहा प्रमाण पत्र बन गया है, जल्दी ले जाओ। उसके जाने के बाद युवक ने बोला कि प्रमाणपत्र बन गया है। उसने रुपए मांगे तो टीम ने पूछा कि किसे रुपए देने है। तब वह बोला कि मुझे ही रुपए देने होंगे। तब उसने दौ सौ रुपए लेकर जेब में रख लिए। वह बोला कि पांच नंबर खिड़की पर चले जाओ, जो अभी लड़का आया था उसे देख लिया है ना। वहां पर ये रसीद दे देना। भास्कर टीम जैसे ही 5 नंबर खिड़की पर पहुंची तो निगम कर्मचारी ने आसपास बैठे कर्मचारियों को इशारा किया। पहले से ही प्रमाणपत्र बना रखा था। उसने रसीद लेकर तुरंत प्रमाणपत्र दे दिया।

जयपुर नगर निगम ग्रेटर की कार्यवाहक मेयर शीला धाबाई ने कहा कि ये गलत है। वैरी बैड-वैरी बैड। आम जनता से छोटे-छोटे कामों के रुपए लिए जाते हैं। अधिकारियों के साथ मीटिंग कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सख्त निर्देश दिए जाएगें।

डीसी बोले : मैंने आज जॉइन किया है, जांच करेंगे
डीसी मानसरोवर हेमाराम चौधरी ने कहा कि मैंने आज ही जॉइन किया है। ऐसा चल रहा है तो जांच करेंगे। ये गलत है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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