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राजस्थान में डेल्टा+ की जांच शुरू:कोरोना के नए स्ट्रेन की जांच के लिए दिल्ली, पुणे नहीं भेजने पड़ेंगे सैंपल

ByRameshwar Lal

Jun 26, 2021

अब तक देश के चुनिंदा नेशनल इंस्टीट्यूट में होने वाली जिनोम सिक्वेन्सिंग जांच की सुविधा राजस्थान के जयपुर में भी शुरू हो गई है। राज्य स्तर पर इस तरह की जांच प्रक्रिया शुरू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है। जयपुर में प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा शुरू की है। वर्तमान में इस मशीन की क्षमता 20 सैंपल डेली जांचने की है। इसे आने वाले समय में बढ़ाकर 80 तक करने की योजना है। इसे तीसरी लहर की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है।

समय से मिलेगी जानकारी

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि कोविड-19 वायरस के बदले नेचर और उस पर मॉनिटरिंग के लिए यह सुविधा शुरू कराई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक से ये लाभ होगा कि कोरोना वायरस के बदलते स्वरूप (नए स्ट्रेन) का पता समय पर लग जाएगा और उसके अनुसार सरकार आगे की तैयारियां करके उसके बचाव पर काम कर सकती है। अभी कोरोना के स्ट्रेन की जांच के लिए सैंपल दिल्ली भेजने पड़ते हैं। रिपोर्ट आने में काफी वक्त लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के नेचर और उसके बदलते स्वरूप का पता लगाने के लिए यह जांच की जाती है। फिर चाहे वह कोरोना, इंफ्लुएंजा या सार्स किसी भी तरह का वायरस हो उसके सभी स्ट्रेन का पता इस जांच मशीन के जरिए किया जा सकता है।

सेंट्रल लैब भेजे जाते थे हर माह 300 सैंपल
चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के मुताबिक, एसएमएस मेडिकल कॉलेज में करीब 1 करोड़ रुपए की लागत से जिनोम सिक्वेन्सिंग की व्यवस्था शुरू की गई है। इससे पहले जिनोम सिक्वेन्सिंग के लिए प्रदेश से सैंपल केन्द्र सरकार की इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा राजस्थान के लिए निर्धारित दिल्ली स्थिति आईजीआईबी लैब में भिजवाए जा रहे थे। प्रदेश से रोजाना औसत 10 सैंपल यानी महीने में निर्धारित 300 सैंपल दिल्ली स्थित सेंट्रल लैब में भिजवाए जा रहे थे। लेकिन इनकी रिपोर्ट समय पर प्राप्त नहीं हो पा रही थी।

रोजाना 20 सैंपल की जांच की सुविधा
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में लगाई मशीन पर सैंपलिंग का काम इसी महीने से शुरू किया गया है। इस मशीन की क्षमता प्रतिदिन 20 सैंपल जांच करने की है। इसकी क्षमता को बढ़ाकर प्रतिदिन 80 सैंपल की जांच की जाएगी। चिकित्सा मंत्री ने बताया कि अब तक कोविड-19 के करीब 100 सैंपल की जिनोम सिक्वेन्सिंग हुई है। इनमें लगभग 90 प्रतिशत डेल्टा वैरिएंट के केस हैं। शेष 10 प्रतिशत कोविड-19 का बी 1.1 वैरिएंट मिले हैं।

राजस्थान में आया डेल्ट+ का पहला केस
देश में अप्रैल-मई में जो दूसरी लहर आई थी, उसके लिए डेल्टा वैरिएंट को जिम्मेदार माना गया है। लेकिन अब देश में कोरोना के नए वैरिएंट डेल्टा+ ने चिंता बढ़ा दी है। वर्तमान में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में इस नए वैरिएंट के केस सामने आए हैं। सबसे ज्यादा 21 मामले महाराष्ट्र में मिले हैं। साथ ही अब राजस्थान में भी इस वेरियंट ने दस्तक दे दी है। इसका पहला केस आज बीकानेर में सामने आया है, जहां एक महिला में इस वरियंट के मिलने की पुष्टि हुई है। प्रदेश के वरिष्ठ चिकित्सक और मुख्यमंत्री कोविड प्रबंधन सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि अगर तीसरी लहर जल्द आती है तो इसके लिए यह वैरिएंट जिम्मेदार हो सकता है। हालांकि, इस वैरिएंट पर अभी शोध चल रहा है कि यह कितना घातक है। उन्होंने सलाह दी है कि अगर किसी व्यक्ति के वैक्सीन की दोनों डोज लग भी चुकी है, तो भी वह कोविड नियमों का सख्ती से पालन करें और मास्क जरूर लगाएं।

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