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सरकार बचाने के लिए , विधायकों के दांव पेंच

ByRameshwar Lal

Jul 21, 2021

प्रदेश में कांग्रेस की सियासी रस्साकसी के कारण निर्दलीय, बसपा से कांग्रेस में आए और एक गुट विशेष के विधायकों की मर्जी पर सरकार मेहरबान है।

क्षेत्र में अफसरों की तैनाती और रवानगी तो विधायकों की मर्जी से होती ही है,

लेकिन सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों को इसके अलावा कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी हैं।

आलम यह है कि अफसरों का पूरा समय इन विधायकों की मिजाजपुर्सी में ही बीतता है

क्योंकि साहब नाराज हुए तो एक फोन पर उन्हें एपीओ कर चार्जशीट थमा दी जाती है… खुश हुए तो ब्लैक लिस्ट हो रहे ठेकेदार को भी क्लीनचिट दिलवा लाते हैं।

01. विजिलेंस कमेटी ने मानी गड़बड़ी, विधायक की चिट्‌ठी के बाद यू-टर्न

जलजीवन मिशन के दूदू प्रोजेक्ट की विजिलेंस कमेटी से जांच के बाद एसीएस सुधांश पंत ने गड़बड़ करने वाले एक्सईएन योगेंद्र सिंह,

एईएन दीपेश चौधरी व जेईएन युधिष्टिर मीना को चार्जशीट देने और ठेकेदार फर्म मै. यादव कंस्ट्रक्शन कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश दिए थे,

लेकिन निर्दलीय विधायक बाबूलाल नागर ने जलदाय मंत्री बीडी कल्ला को चिट्‌ठी दी।

इसके बाद मंत्री ने केवल एक टंकी को छोड़कर पूरा काम शुरू करवाने का आदेश दे दिया। जांच भी बदल दी।

विधायक नागर का कहना है कि जनता को पानी पिलाना जिम्मेदारी है। टेंडर में गड़बड़ी और घटिया कंस्ट्रक्शन की जांच करवाओ, लेकिन काम चलना चाहिए।

02. विधायक की आपत्ति के बाद पूरी लिस्ट निरस्त

जयपुर डिस्कॉम में पिछले दिनों 11 अधीक्षण अभियंताओं के तबादले की सूची निकाली थी।

करौली का अधीक्षण अभियंता बदलते ही बसपा से कांग्रेस में आए विधायक लाखन मीना ने आपत्ति कर दी।

इसके बाद डिस्कॉम प्रबंधन ने पूरी लिस्ट ही निरस्त कर दी।

पहली बार एसई स्तर के अफसरों की पूरी लिस्ट निरस्त हुई है। अब विधायकों से पूछ कर दोबारा लिस्ट बनाई जा रही है।

03. शराब दुकानों को चेक करने वाले विधायक को वाई सुरक्षा

महुआ निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुड़ला खुद ही अपनी टीम के साथ शराब की दुकानों की चेकिंग ले लिए जाते है।

शराब ठेकेदारों ने विधायक स्तर पर चेकिंग को लेकर आपत्ति और शिकायत भी की। इस पर विधायक ने खुद की जान का खतरा बताया और सरकार ने उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दे दी।

04. जिस एक्सईएन के साथ मारपीट की, उसे हटा दिया

बहरोड़ एक्सईएन जेपी शर्मा के साथ कुछ लोगों ने मारपीट कर दी थी।

सरकार ने कुछ दिन बाद ही एक्सईएन को एपीओ करवा कर दिया।

एक्सईएन का आरोप है कि मारपीट करने वाले विधायक समर्थक थे।

मुकदमे की जांच सीआईडी कर रही है।

हाल ही में बहरोड़ एसडीएम संतोष कुमार ने भी विधायक बलजीत यादव के खिलाफ दुर्व्यवहार की लिखित शिकायत की है।

विधायक बलजीत यादव का कहना है,

कि एक्सईएन की मारपीट वाली रिपोर्ट में मेरा नाम नहीं था।

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