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कोरोना तबाही मचा रहा था, फेसबुक अफवाह फैला रहा था:अप्रैल-मई में फेसबुक ने 10 करोड़ और ट्विटर ने 35 लाख भारतीयों तक फैलाई झूठी जानकारी, पैसे के चक्कर में नहीं लगा रहे रोक

ByRameshwar Lal

Jun 12, 2021
  • भारत में विज्ञापन से मिलने वाला रेवेन्यू कम होने के चलते कंपनियां यहां फैक्ट चेक नहीं करा रही हैं
  • बाबा रामदेव के पोस्ट भी भ्रामक हैं, लेकिन करोड़ों डॉलर के चक्कर में उन्हें नहीं हटाया जा रहा है
  • भारत में फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कोरोना के इलाज को लेकर भ्रामक दावों की भरमार है। ऐसे दावे हिन्दी भाषा में अधिक हैं, क्योंकि इन कंपनियों के पास हिन्दी भाषा से जुड़ी फैक्ट चे‌किंग का कोई ठोस सिस्टम नहीं है। यह खुलासा ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म की रिपोर्ट में हुआ है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से मई के बीच 150 ऐसी पोस्ट सामने आईं, जिनमें कोरोना के इलाज के देसी तरीके बताए गए हैं। बड़ी बात यह कि इन पोस्ट की रीच यानी ऐसी पोस्ट को देखने वालों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। इनमें से करोड़ों लोग ऐसी पोस्ट को लाइक और शेयर कर रहे हैं। बहुत से लोग कमेंट में अपनी राय भी दे रहे हैं।

जबकि डॉक्टर्स और WHO लगातार ऐसे किसी भी इलाज से लोगों को बचने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद फेसबुक जून के पहले सप्ताह तक इन भ्रामक पोस्ट का 7% भी अपने प्लेटफॉर्म से डिलीट नहीं कर पाया है। यहां तक कि ऐसे पोस्ट पर भ्रामक होने का लेबल भी नहीं लगा पाया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल-मई में 10 करोड़ लोगों को गलत जानकारी से प्रभावित करने वाली इन 150 भ्रामक पोस्ट में से बमुश्किल 10 पोस्ट को या तो हटाया गया है या फिर उन पर झूठी जानकारी फैलाने का लेबल लगाया गया है।फैक्ट चेक साइट ऑल्ट न्यूज के प्रतीक सिन्हा के अनुसार फेसबुक और अन्य कंपनियों को गलत सूचनाओं से लड़ने के लिए अधिक स्टाफ की जरूरत है, लेकिन मुनाफाखोरी के कारण ऐसा नहीं किया गया है। भारत और अमेरिका में विज्ञापन की कीमतों में अंतर है। यहां उतना पैसा नहीं मिलता, इसलिए कंपनी स्टाफ में निवेश करने में रुचि नहीं लेतीं, लिहाजा पोस्ट फिल्टर नहीं हो पाती हैं।

ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म की रिपोर्ट के मुताबिक बाबा रामदेव कोरोनिल किट से कोरोना के ‌इलाज का दावा कर रहे हैं। सोशल मीडिया में ठीक से सांस न ले पाने वालों को लेकर उनका वीडियो लाखों लोग देख चुके हैं, लेकिन उनके किसी पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

ऑक्सफोर्ड की रिसर्च फेलो सुमित्रा बद्रीनाथन कहती हैं- फेसबुक पर बाबा रामदेव की मौजूदगी करोड़ों डॉलर का सवाल है। इसलिए फेसबुक उनके भ्रामक पोस्ट नहीं हटा रहा है। असल में बाबा रामदेव के ऐसे दावे दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा भी बन रहे हैं। यूट्यूब पर ऐसे कई वीडियो तैरने लगे हैं।

यूट्यूब पर ऐसे ही कई और बाबा हैं जो अपने तरीकों से लोगों को कोरोना का इलाज बता रहे हैं। इनमें से एक स्वामी इंद्रदेव जी महाराज भी हैं, जिनका एक वीडियो खूब शेयर हुआ है। इसमें उन्होंने कहा है कि भाप लेने से कभी कोरोना नहीं होता। वो दावा करते हैं कि अगर पूरा परिवार भाप ले तो मास्क और सैनिटाइजर न लगाने पर भी कोरोना नहीं होगा, क्योंकि यह आपके शरीर को अंदर से सैनिटाइज करता है और फेफड़े ठीक रहते हैं। जबकि WHO ने पिछले साल ही इसे लेकर चेतावनी जारी की थी और ऐसे किसी उपाय को करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने को कहा था। कई अलग-अलग स्टडी में यह भी कहा गया है कि बिना डॉक्टरी सलाह के नियमित भाप लेना कई बार जानलेवा साबित हो सकता है।

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