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3 दिन में ड्रोन से आतंकी घटना अंजाम देने की 3 कोशिशें, भारत के पास इन्हें रोकने के लिए कौनसी टेक्नोलॉजी?

ByRameshwar Lal

Jun 30, 2021

जम्मू में शनिवार रात आर्मी के टेक्निकल एरिया में आतंकियों ने ड्रोन से दो ब्लास्ट किए हैं। इसमें एयरफोर्स के 2 जवानों को हल्की चोटें आई हैं और एक बिल्डिंग की छत को नुकसान पहुंचा है। रविवार की रात को भी जम्मू के कालूचक मिलिट्री बेस पर ड्रोन नजर आया है। सोमवार देर रात सुंजवान मिलिट्री स्टेशन के पास संदिग्ध ड्रोन नजर आया। तीन दिन के भीतर तीन बार ड्रोन एक्टिविटी से सरकार सतर्क हो गई है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और हमले की जांच की जा रही है। ये पहली बार हो रहा है जब आतंकियों ने ड्रोन के जरिए ब्लास्ट को अंजाम दिया है।

समझते हैं, ड्रोन क्या होते हैं? इनके जरिए कैसे हमले को अंजाम दिया जाता है और क्या ड्रोन हमले से निपटने का कोई तरीका है?

ड्रोन होते क्या हैं?
आपने अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। ड्रोन को अनमेन्ड एरियल व्हीकल (UAV) भी कहा जाता है यानी मानवरहित विमान। चूंकि इन्हें रिमोट से कंट्रोल किया जाता है इसलिए इन्हें उड़ाने के लिए किसी पायलट की जरूरत नहीं होती है। आप इन्हें आसमान में उड़ता हुआ एक रोबोट समझिए, जिसे रिमोट से दूर से ही कंट्रोल किया जाता है

क्या भारत के पास ड्रोन हमले रोकने की कोई टेक्नोलॉजी है?
हां। भारत के हर बड़े एयरबेस, मिलिट्री बेस और इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर AVIAN रडार जैसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी है। इसके जरिए 10 से 15 किलोमीटर में उड़ने वाली चिड़िया को भी डिटेक्ट किया जा सकता है।

भारत के पास नेट फायर गन भी है। जो ड्रोन को नेट (जाली) में फंसाकर जमीन पर गिरा देती है।

DRDO एंटी-ड्रोन सिस्टम पर भी काम कर रहा है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक ये सिस्टम तैयार हो जाएगा। इसके जरिए 3 किलोमीटर के दायरे में उड़ने वाले ड्रोन को डिटेक्ट किया जा सकता है। साथ ही 2.5 किलोमीटर के दायरे में ये ड्रोन को नष्ट कर सकता है।

तो फिर खतरा कहां है?

  • फिलहाल भारतीय सेना के पास जो टेक्नोलॉजी है, वो बड़े एयरक्राफ्ट और ड्रोन को डिटेक्ट करती है। छोटे ड्रोन को पहचानने के लिए हमारे पास टेक्नोलॉजी नहीं है।
  • AVIAN रडार जैसी टेक्नोलॉजी बेहद महंगी है। इसे हर जगह लगाना एक खर्चीला काम है।

ड्रोन हमले कितने घातक होते हैं?

ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर करता है। पेलोड यानी ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड कैपेसिटी जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जा सकते हैं। अमेरिका इन ड्रोन का इस्तेमाल हमलों के लिए कई बार कर चुका है।

क्या मिसाइल हमले की तरह ड्रोन हमले को रोकने का भी कोई तरीका है?

  • हां। ड्रोन हमलों को रोकने के लिए दुनिया के कई देश अलग-अलग टेक्नोलॉजी अपनाते हैं। इजराइल के लिए आयरन डोम बनाने वाली कंपनी राफेल ने ड्रोन डोम भी विकसित किया है, जो ड्रोन को डिटेक्ट कर लेता है। इस टेक्नोलॉजी में जैमर, रडार और सेंसर के जरिए ड्रोन को डिटेक्ट कर लेजर से उन्हें नष्ट कर दिया जाता है।
  • इसी तरह अमेरिकी कंपनी फोर्टम टेक्नोलॉजी ने ड्रोन हंटर नाम से टेक्नोलॉजी डेवलप की है। ये एक इंटरसेप्टर ड्रोन है जो दुश्मन के ड्रोन को डिटेक्ट करते ही उसे एक नेट (जाल) में कैद कर लेता है।
  • इसके अलावा कई देश ड्रोन से निपटने के लिए रडार और ड्रोनगन का इस्तेमाल भी करते हैं। इस तकनीक में फ्रीक्वेंसी के जरिए ड्रोन को डिटेक्ट कर लिया जाता है।
  • भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए क्या कोई गाइडलाइन है?
  • नैनो ड्रोन के अलावा बाकी सभी ड्रोन को उड़ाने के लिए आपको डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से एक विशिष्ट पहचान संख्या (Unique Identification Number) लेना होता है।
  • किसी भी ड्रोन को मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में उड़ाना प्रतिबंधित है।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और बाकी एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित है।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित है।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी के हिसाब से इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

भारतीय सेना की ड्रोन ताकत

  • भारतीय सेना अमेरिकी कंपनी जनरल एटोमिक्स से जल्द ही 30 MQ-9 रीपर ड्रोन खरीदने वाली है।
  • भारत ने 15 जनवरी 2021 को आर्मी डे की परेड में पहली बार ड्रोन को शामिल किया था। 75 ड्रोन ने अलग-अलग मॉक मिशन को अंजाम दिया था।
  • भारतीय सेना इजराइल से 4 हेरोन TP ड्रोन को लीज पर लेने की तैयारी भी कर रही है।
  • भारतीय सेना के पास DRDO द्वारा विकसित रुस्तम और निशांत ड्रोन भी है।
  • हां। भारत सरकार ने ड्रोन के वजन के आधार पर उन्हें 5 अलग-अलग कैटेगरी में बांटा है।
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