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6 साल बाद कैलाश विजयवर्गीय को बंगाल से हटाया जा सकता है

ByRameshwar Lal

Jun 17, 2021

भाजपा ने जून 2015 में कैलाश विजयवर्गीय को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया था और इसी के साथ बंगाल का प्रभारी भी बनाया था। विजयवर्गीय ने सिद्धार्थ नाथ सिंह की जगह ली थी, जो उनके पहले राज्य के प्रभारी हुआ करते थे। अब 6 साल बाद विजयवर्गीय को बंगाल से हटाया जा सकता है।

बीते 6 सालों में दो विधानसभा चुनाव (2016 और 2021) और एक लोकसभा चुनाव (2019) हुए। लेकिन बंगाल में विधानसभा के दोनों ही चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा चुनाव में जरूर 42 में से 18 सीटें जीतकर BJP ने सबको हैरान कर दिया था।भाजपा ने मिशन बंगाल पर 2015 से ही विजयवर्गीय को सक्रिय कर दिया था। तब राज्य के प्रभारी से लेकर प्रदेश अध्यक्ष बदलने तक की कवायद इसलिए की गई थी ताकि 2016 के विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया जा सके। वहीं विजयवर्गीय को मौका हरियाणा में 2014 में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के चलते मिला था। हालांकि बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव में 10.2% वोट शेयर के साथ BJP महज 3 सीट जीत सकी थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में 40% वोट शेयर के साथ पार्टी ने 42 में से 18 सीटें जीतीं। 2021 में 38.09% वोट शेयर के साथ 294 में से 77 सीट BJP के खाते में आईं। जबकि पार्टी ने 200 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित भाजपा ने पूरी ताकत बंगाल में झोंक दी थी। इसके बावजूद विधानसभा चुनाव में 77 सीटें ही आ सकीं। लोकसभा चुनाव के मुकाबले वोट शेयर भी 2% कम हो गया।

अब चर्चा है कि कैलाश विजयवर्गीय से बंगाल का प्रभार लिया जा सकता है। उनकी जगह केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान या राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को कमान दी जा सकती है। राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव का नाम भी चर्चा में है।

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