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चित्रकूट मंथन में जगद्गुरु का मंत्र:रामभद्राचार्य ने संघ को 7 मुद्दे सुझाए, धर्म परिवर्तन और जनसंख्या कानून बने, कहा- मोदी भी इन्हें मानेंगे

ByRameshwar Lal

Jul 13, 2021

चित्रकूट में मंथन का आज आखिरी दिन है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उस मास्टर प्लान का खाका खींचने में जुटा है, जिसके आधार पर आगे भाजपा और केंद्र सरकार को चलना है। इस मंथन के बाद सरकार कुछ बड़े फैसले भी ले सकती है। इन फैसलों पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के सुझाव भी असर डाल सकते हैं।

दरअसल, 9 से 13 जुलाई तक चलने वाले इस मंथन से दो दिन पहले 7 जुलाई को संघ प्रमुख मोहन भागवत रामभद्राचार्य का आशीर्वाद लेने पहुंचे। जगद्गुरु ने गुरुमंत्र के तौर पर संघ प्रमुख को 7 मुद्दे दिए। इनमें धर्म परिवर्तन पर रोक और जनसंख्या नियंत्रण पर कानून भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ भले इन मुद्दों को माने या न माने, पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो इन्हें मानेंगे ही। जानिए, रामभद्राचार्य ने गुरुमंत्र में संघ प्रमुख को कौन से 7 मुद्दों पर विचार को कहा…

1. जम्मू-कश्मीर
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है। राज्य में चुनाव कराए जाने को लेकर बैठकें जारी हैं। जगद्गुरु ने कहा कि भारत के नक्शे में आधा-अधूरा कश्मीर नहीं, बल्कि पूरा कश्मीर जुड़ना चाहिए।

2. धर्म परिवर्तन
उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन को लेकर कार्रवाई जारी है। इस मसले पर रामभद्राचार्य ने कहा कि केंद्र को सख्त कानून बनाना चाहिए और ये काम जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।

3. जनसंख्या नियंत्रण
जगद्गुरु ने कहा कि देश में मुस्लिमों की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है और हिंदुओं की संख्या उस अनुपात में कम होती जा रही है। इसे देखते हुए जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जल्द से जल्द कानून बनना ही चाहिए।

4. गोरक्षा
रामभद्राचार्य हिंदुओं के बीच धार्मिक महत्व रखने वाली गाय की रक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। उन्होंने गोवध को पूरी तरह से निषेध करने का मुद्दा भी भागवत को सुझाया।

5. समान नागरिक संहिता

उन्होंने कहा कि देश के भीतर एक कानून होना चाहिए, फिर चाहे नागिरक किसी भी धर्म का क्यों न हो। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता तुरंत लागू किए जाने की जरूरत है।

6. हिंदी राष्ट्र भाषा हो
रामभद्राचार्य ने मोहन भागवत से कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया जाए। इस मुद्दे पर मंथन के दौरान चर्चा की जानी चाहिए।

7. रामायण
जगद्गुरु ने कहा कि रामायण को राष्ट्रीय ग्रंथ बनाना चाहिए। मंथन के दौरान जुटे संघ के पदाधिकारी इसे लेकर कोई स्टैंड लें और सरकार इस पर जल्द कदम उठाए।

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