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प्रवासी भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं:अमेरिका में H-1B वीजा वाले देश छोड़ने के लिए मजबूर; दक्षिण एशियाई लोगों की नौकरियों पर संकट

कोरोना के कारण इन दिनों अमेरिका में रह रहे प्रवासी भारतीयों की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। क्योंकि, महामारी के कारण उनकी नौकरियां जा रही हैं। ऐसे में H-1B वीसा पर रहे लोगों के लिए दो ही रास्ते बचे हैं। पहला- नौकरी ढूंढकर वीसा अवधि बढ़वाओ, दूसरा- अमेरिका छोड़कर चले जाओ।

वैसे तो इस श्रेणी के वीसा के ग्रेस पीरियड मिलता है, लेकिन इस दौरान दूसरी नौकरी ढूंढना अनिवार्य होता है। पर महामारी से चरमराई अर्थव्यवस्था के कारण लोगों को दूसरी नौकरी मिल नहीं रही, इसलिए ऐसे लोग अमेरिका छोड़कर जाने को मजबूर हो रहे हैं।

सामान बेचने को मजबूर हो रहे लोग
कई भारतीय प्रोफेशनल्स जॉब छूटने के बाद उन्हें अपना बेड, सोफा और दूसरा सामान बेचने को मजबूर हो रहे हैं। पिछले एक साल बहुत बड़ी संख्या में विदेशी प्रोफेशनल्स बेरोजगार हुए हैं। एक भारतीय इंजीनियर के अनुसार उन्हें सिर्फ इसलिए उनका वीसा स्टेटस देखकर रिजेक्ट कर दिया गया।

दुनियाभर से प्रोफेशनल्स काम की तलाश में एच-1बी वीसा पर अमेरिका पहुंचते हैं। इनमें भारतीयों की संख्या सर्वाधिक होती है। अध्यक्ष, अमेरिकी आव्रजन एसोसिएशन जेनिफर माइनर के अनुसार इस समय नौकरी खोने से जुड़ी अनिश्चितता बहुत है, फिर चाहें आप कोई भी हों। इस हाल में एक आप्रवासी के लिए तो यह अनिश्चितता निश्चित रूप से बढ़ जाती है।

ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में रिसर्च:कपड़ों को जमीन में गाड़कर जांच रहे मिट्‌टी की गुणवत्ता; कपड़ा जितना नष्ट होगा, जमीन उतनी ही उपजाऊ होगी

दुनिया भर में वैज्ञानिक या किसान मिट्‌टी की गुणवत्ता जांचने के लिए अलग-अलग प्रयोग करते हैं। आम तौर पर विशेषज्ञ कभी लैब में या फिर कभी खेत में ही मिट्टी की जांच करते हैं। लेकिन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में उन्होंने इसके लिए अनूठा तरीका अपनाया है। इसमें वे मिट्‌टी में सूती कपड़ों को दबाकर मिट्‌टी की गुणवत्ता जांच रहे हैं, जो काफी हद तक सटीक भी पाई जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे इस प्रयोग में किसानों के साथ स्कूली छात्रों को भी शामिल किया गया है।

सिटीजन साइंस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को इस तरह के सूती कपड़े खेतों में गाड़ने के लिए दिए जा रहे हैं। इसके साथ टी-बैग भी दिए जा रहे हैं ताकि तुलना की जा सके कि दोनों में किसे कितना नुकसान हुआ है। उन्हें एक हफ्ते या महीने बाद निकालकर देखा जाता है कि कपड़ा कितना नष्ट हुआ है। इसके डिजिटल विश्लेषण से पता चलता है कि मिट्‌टी की गुणवत्ता कैसी है और वह कितनी उपजाऊ है।

चीन का 21 टन वजनी रॉकेट बेकाबू:विशेषज्ञ बाेले- कहीं भी गिरकर भारी तबाही मचा सकता है, 8 मई को वायुमंडल में करेगा प्रवेश;

अंतरिक्ष में भेजा गया चीन का रॉकेट लॉन्ग मार्च 5बी अनियंत्रित होकर पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है और कहीं भी गिर सकता है। यह रॉकेट का मुख्य हिस्सा यानी कोर है। इसका वजन 21 टन है और करीब 100 फीट लंबा है। शनिवार 8 मई को इसके वायुमंडल में प्रवेश की संभावना है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी समेत कई देश अपने रडार से इस रॉकेट पर नजर बनाए हुए है ताकि अगर यह किसी देश के ऊपर आता है तो पहले ही इसकी सूचना लोगों को दे दी जाए।

पिछले साल भी एक रॉकेट गिरा था
इसकी गति और बदलती ऊंचाई से यह पता करना मुश्किल हो रहा है कि ये धरती पर कब, किस दिन और कहां गिरेगा। वैसे तो धरती के वायुमंडल में आते ही इसका अधिकतर हिस्सा जलकर खाक हो जाएगा, लेकिन छोटा-मोटा हिस्सा भी आबादी वाले इलाके में गिरा तो तबाही मचा देगा। पिछले साल मई में चीन का एक रॉकेट पश्चिमी अफ्रीका और अटलांटिक महासागर में गिरा था। चीन ने अंतरिक्ष में अपना स्पेस स्टेशन बनाने के लिए अब तक के सबसे भारी इस रॉकेट को 28 अप्रैल को अपने तियानहे स्पेस स्टेशन से लॉन्च किया था।

US का सख्त कदम:4 मई से अमेरिका नहीं जा सकेंगे भारतीय, कोविड-19 के नए वैरिएंट को देखते हुए बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन का फैसला

अमेरिका ने भारत में कोविड-19 के नए और खतरनाक वैरिएंट को देखते हुए शुक्रवार रात एक सख्ता फैसला लिया। जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ने 4 मई से भारत से आने वालों लोगों पर रोक लगा दी है। व्हाइट हाउस ने यह घोषणा की। बयान में कहा गया है कि भारत में फैला वायरस खतरनाक है, इसके कुछ और वैरिएंट्स भी हो सकते हैं। लिहाजा, ऐहतियात के तौर पर भारत से आने वाले लोगों पर पाबंदी लगाई जा रही है, ताकि अमेरिका में हालात खराब न हों। अमेरिकी सरकार ने यह फैसला हेल्थ डिपार्टमेंट की सलाह पर लिया है।

इसके पहले गुरुवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की थी। यूएस न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा था। शुक्रवार को जैसे ही यह रिपोर्ट मिली, इसके बाद भारत से आने वाले लोगों पर पाबंदियां लगा दी गईं। इस बारे में विस्तार से जानकारी अमेरिकी विदेश विभाग बाद में देगा।

भारत में हालात चिंताजनक
व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया- भारत से आने वालों लोगों पर पाबंदियां इसलिए लगाई जा रही हैं क्योंकि वहां कोवड-19 की दूसरी लहर से हालात बेहद खराब हो चले हैं। भारत में कोविड के कई वैरिएंट्स सर्कुलेट हो रहे हैं और वहां स्थिती चिंताजनक है।

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत में शुक्रवार को 3.86 लाख मामले सामने आए हैं। अमेरिका के बाद भारत में ही सबसे ज्यादा मामले अब तक दर्ज किए गए हैं। अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वास्तविक आंकड़े इससे अलग और ज्यादा गंभीर हैं।

US प्रेसीडेंट के मेडिकल एडवाइजर की सलाह:

भारत में दूसरी लहर के बढ़ते प्रकोप को रोकने और कोरोना की चैन तोड़ने के लिए कुछ हफ्तों का लॉकडाउन लगाना होगा। यह सुझाव अमेरिका के एपिडेमोलॉजिस्ट एंथोनी फॉसी ने अंग्रेजी अखबार को एक इंटरव्यू में दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत में दूसरी लहर थमती नजर नहीं आ रही है। इसके अलावा उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई, मेडिकेशन और PPE किट के उत्पादन पर भी ज्यादा से ज्यादा जोर देने कहा है।

उन्होंने कहा कि महामारी की भयावहता को देखते हुए, एक ग्रुप तैयार करना चाहिए। जो चुनौतियों को जाने और सभी चीजों को व्यवस्थित करे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत ने कोरोना से पहले ही जीत की घोषणा कर दी थी। फॉसी बाइडन प्रशासन में चीफ मेडिकल एडवाइजर हैं।

फॉसी के इंटरव्यू की अहम बातें..

6 महीने का नहीं पर आंशिक तौर पर लॉकडाउन लगाना जरूरी

भारत में मौतें कोरोना के अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव में हुई

लोगों को ऑक्सीजन की तलाश करते सुना

समस्या से निपटने में वैक्सीनेशन निभा सकता है अहम रोल

भारत को वैक्सीन नहीं देगा ब्रिटेन


ब्रिटेन के हेल्थ मिनिस्टर मैट हनूक ने बुधवार शाम साफ कर दिया कि उनके देश के पास कोविड-19 वैक्सीन का ओवर स्टॉक नहीं है। हनूक के मुताबिक ब्रिटेन के पास उसकी जरूरत के हिसाब से वैक्सीन हैं, इसे एक्सेस स्टॉक नहीं कहना चाहिए। यही वजह है कि हम भारत को वैक्सीन नहीं दे पाएंगे। इसके अलावा वेंटिलेटर्स और दूसरे जरूरी मेडिकल इक्विपमेंट्स नई दिल्ली भेजे जा रहे हैं।

हनूक ने कहा कि ब्रिटेन में अब वेंटिलेटर्स की जरूरत नहीं है, लिहाजा अब ये भारत भेजे जा रहे हैं। भारत के पास अपनी वैक्सीन है जो ब्रिटिश टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है। यह बहुत बड़ी कामयाबी है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया के किसी भी ऑर्गेनाइजेशन से ज्यादा वैक्सीन बना रहा है।

कोरोना दुनिया में:संक्रमितों का आंकड़ा 15 करोड़ के पार; WHO बोला- 17 देशों में मिला वायरस का इंडियन स्ट्रेन

दुनिया में कोरोना की चपेट में आने वालों का आंकड़ा 15 करोड़ के पार पहुंच गया है। अब तक 15.02 करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 31.63 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है जबकि 12.82 लाख लोगों ने कोरोना को मात दी है। फिलहाल 1.93 करोड़ लोगों का इलाज चल रहा है। इनमें 1.92 करोड़ लोगों में कोरोना के हल्के लक्षण हैं और 1.10 लाख लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।

उधर, कोरोना वायरस का इंडियन वैरिएंट दुनिया के 17 देशों में पहुंच चुका है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने बताया कि दुनिया में पिछले हफ्ते कोरोना के 57 लाख मामले सामने आए। यह आंकड़े पहली पीक से कहीं ज्यादा हैं। इंडियन स्ट्रेन या B.1.617 वैरिएंट (डबल म्यूटेशन वैरिएंट) की वजह से ही भारत में लगातार कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। WHO ने इसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (VOI) घोषित किया है।

खुले में कोरोना वायरस का खतरा कम

दुनिया में कोरोना महामारी को लेकर हाहाकार है। वैज्ञनिक इसके प्रसार के कारण और रोकथाम के लिए टीकों के आविष्कार के शोध में दिन-रात एक किए हुए हैं। ऐसे में वायरस के प्रसार को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है कि वायरस खुले के मुकाबले बंद माहौल में तेजी से फैलता है। ब्रिघम और महिला अस्पताल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. पॉल सैक्स के ‘द न्यू वर्ल्ड जर्नल’ में प्रकाशित शोध के अनुसार खुले में वायरस बहुत देर तक जिंदा नहीं रह पाता।

हाल के अध्ययन से पता चला है कि कोरोना वायरस और सांस से जुड़े अन्य वायरस का संक्रमण 10 प्रतिशत से कम खुली जगह हुआ। जबकि, बंद जगह में बाहर के मुकाबले संक्रमण के मामले 18 गुना अधिक थे। वहीं, बंद एरिया में होने वाले सामाजिक आयोजनों में वायरस सुपरस्प्रेडर बन गया, यहां संक्रमण की संभावना 33 गुना अधिक थी।

कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी के महामारी विज्ञान और जीव विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नूशिन रजानी के अनुसार बाहर के माहौल में संक्रमित होना पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति कितनी देर बाहर रहा। बाहर रहने का समय जितना अधिक होगा, संक्रमण की संभावना उतनी अधिक होगी। इसिलए मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बेहद जरूरी है।

पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण के जितने मामले उसका 38% हिस्सा भारत में मिल रहा है

  • पाकिस्तान में कोरोना के कारण हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। 16 शहरों में सेना की तैनाती की गई है।
  • थाइलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान-ओचा पर मास्क न पहनने पर जुर्माना लगा है। उन पर 190 डॉलर यानी करीब 14 हजार 200 रु. जुर्माना लगाया गया।
  • कोरोना टीका लगवा चुके लोग इजरायल जा सकेंगे। मई से ऐसे लोगों को प्रवेश देने की तैयारी हो रही है।
  • कनाडा का ओंटारियो प्रांत कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित है। वहां स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए सेना और रेडक्राॅस मैदान में उतार दिए गए हैं।
  • भारत से स्पेन पहुंचने वालों लोगों को क्वारेंटाइन होना होगा। वहां की सरकार ने इसके आदेश दे दिए हैं।

पिछले चार दिन से भारत में रोज तीन लाख से ऊपर कोरोना मरीज मिल रहे हैं। दुनिया भर के कुल संक्रमण में भारत का हिस्सा 38% हो गया है। जॉन हाॅपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक एक महीने पहले भारत के संक्रमण का यह आंकड़ा 9 प्रतिशत था। दूसरी ओर तुर्की ने लॉकडाउन लगा दिया है। वहीं, जापान में ओलिंपिक आयोजन शिफ्ट करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

कोरोना दुनिया में:​​​​​​​फिजी में वायरस का इंडियन वैरिएंट मिलने से हड़कंप; भारत के लिए कनाडा ने एक करोड़ डॉलर की मदद का ऐलान किया

इंडियन वैरिएंट के 6 मामले सामने आए
फिजी के स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं के परमानेंट जेम्स फोंग ने कहा कि मंगलवार को देश में कोरोना के इंडियन वैरिएंट के 6 मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जिस तरह से कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, उसे देखकर हम डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की तरह हम फिजी में भयावह हालात पैदा नहीं होने दे सकते।

पेसिफिक देश फिजी में कोराना का इंडियन वैरिएंट मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। महामारी की चेन तोड़ने के लिए फिजी की राजधानी सुवा में बीते दिन ही 14 दिन का लॉकडाउन लगाया गया था। इसके एक महज एक दिन बाद भारतीय वैरिएंट की पुष्टि होने के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट चिंता में पड़ गया है। उन्हें इस बात का डर है कि कहीं इस वैरिएंट के मिलने के बाद देश में कोरोना के मामलों की सुनामी न आ जाए।

उधर, भारत में कोरोना के बिगड़ते हालात के बीच अब कनाडा ने मदद का हाथ बढ़ाया है। यहां की इंटरनेशनल डेवलपमेंट की मंत्री करीना गाउल्ड ने बताया कि कनाडा ने भारत के लिए 10 मिलियन यानी एक करोड़ डॉलर (74.39 करोड़ रुपए) की मदद करने का ऐलान किया है। इससे उन्हें कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सहायता मिलेगी।

ड्रैगन की दगाबाजी:दुनिया भर के देशों ने भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया, वहीं चीन ने मेडिकल सप्लाई ले जा रही कार्गाे उड़ानें रोकीं

अमेरिका सहित कई देशाें ने कोरोना संकट के दौर में भारत के लिए मदद की पहल की। लेकिन चीन ने मदद की पेशकश करने के बाद मेडिकल सप्लाई में रुकावटें पैदा कर दी हैं। चीन की सरकारी विमानन कंपनी सिचुआन एयरलाइंस ने भारत के लिए अपनी सभी कार्गों उड़ानों को अगले 15 दिनों के लिए रोक दिया है। इन विमानों के जरिए भारत को अतिआवश्यक ऑक्सीजन कसन्ट्रेटर और अन्य चिकित्सीय उपकरणों की आपूर्ति की जा रही थी।

इस हरकत के बाद चीन के निजी कारोबारियों से भारत को मेडिकल उपकरण मिलने में परेशानी खड़ी हो गई है। यह भी शिकायत आ रही है कि चीनी निर्माताओं ने ऑक्सीजन संबधी उपकरणाें की कीमतों को 35-40% तक बढ़ा दिया है। चीन से भारत को सामान पहुंचाने में लगने वाली फीस में भी 29% की वृद्धि की गई है। इससे दोनों देशों के कारेाबारियों द्वारा तेजी से ऑक्सीजन कसन्ट्रेटर खरीदने और भारत को भेजने में बाधा उत्पन्न हाेगी। कंपनी ने शियान-दिल्ली सहित 6 मार्गों पर कार्गो सेवा स्थगित की है। कंपनी ने इसके लिए कोरोना से आयात में कमी का कारण बताया है।

भारत के हालात से WHO दुखी:संगठन के प्रमुख ने कहा- भारत में हालात दिल दहलाने वाले, अस्पताल मरीजों से और श्मशान लाशों से भरे

भारत में कोरोना महामारी से बिगड़ते हालातों पर WHO ने चिंता जताई है। संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रोस गेब्रेयेसस ने कहा कि भारत में इस समय हालात दिल दहलाने वाले हैं। बीते कुछ दिनों में वहां कोरोना के मरीज तेजी से बढ़े हैं। मरीजों के परिजन अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की व्यवस्था के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राजधानी दिल्ली में एक हफ्ते का लॉकडाउन लगाना पड़ा। टेड्रोस ने कहा कि भारत कोविड-19 की भयानक लहर के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। अस्पताल मरीजों से भर गए हैं। श्मशान घाट पर लाशों की कतार लगी है। ये स्थिति हृदयविदारक है।

उन्होंने कहा कि भारत में पोलियो और ट्यूबरक्लोसिस (TB) के खिलाफ काम कर रहे 2600 एक्सपर्ट्स को कोरोना के खिलाफ काम पर लगा दिया गया है। WHO हर तरह से मदद करने की कोशिश कर रहा है। यूनाइटेड नेशन (UN) की हेल्थ एजेंसी भारत को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और अस्पतालों के लिए जरूरी समान की सप्लाई कर रही है।

दुनियाभर में 14 करोड़ 84 लाख कोरोना मरीज
दुनिया में अब तक करीब 14 करोड़ 84 लाख कोरोना मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 31 लाख 33 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व के अमीर देश अपने यहां वैक्सीनेशन प्रोग्राम को तेज करके महामारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत के साथ अमेरिका और जापान
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच सोमवार को फोन पर बातचीत हुई। बाइडेन ने मोदी से कहा- जब अमेरिका कोविड-19 की वजह से मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब भारत ने उसकी भरपूर मदद की थी। अब अमेरिका की बारी है। बातचीत के बाद PM मोदी ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को मदद के लिए धन्यवाद दिया। इससे कुछ देर पहले जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदो सुगा ने भी मोदी से फोन पर चर्चा की।

US सप्लाई करेगा रॉ मटेरियल​​​​​​​
बाइडेन से चर्चा के बाद मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा- हमने वैक्सीन के रॉ मटेरियल और दवाओं की सप्लाई चेन को कारगर बनाने पर चर्चा की। भारत और अमेरिका की हेल्थकेयर पार्टनरशिप दुनिया में कोविड-19 से पैदा हुई चुनौतियों का मुकाबला कर सकती हैं। हमने दोनों देशों में महामारी से बने हालात पर विस्तार से बात की।

सऊदी से 80 टन ऑक्सीजन भारत के लिए रवाना
रविवार को सऊदी अरब के दमाम बंदरगाह से 4 क्रायोजेनिक टैंक में 80 टन ऑक्सीजन भारत के लिए रवाना हुआ। यह जल्द मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा। यह अदाणी समूह की अगुवाई में लाया जा रहा है।