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कोरोना के इलाज का गंभीर साइड इफेक्ट:

कोरोना से संक्रमित डायबिटीज के रोगी इलाज के दौरान एक फंगस का शिकार हो रहे हैं, जो उनकी आंखों की रोशनी तक खत्म कर दे रहा है। जयपुर में 15 दिनों के भीतर 52 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कोरोना से संक्रमित डायबिटीज रोगियों की आंखों की रोशनी चली गई। ये सरकारी अस्पतालों से मिले आंकड़े हैं। भास्कर से बातचीत में एक डॉक्टर ने कहा कि ऐसे केसों की संख्या जयपुर में 200 से भी ज्यादा हो सकती है।

अभी सामने आए मामलों में रोगियों को कोरोना के बाद म्यूकोरमाइकोसिस नाम की बीमारी हो गई। नतीजतन उनकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। भास्कर ने इस बीमारी और फंगल इन्फेक्शन को लेकर जैन ENT के CEO डॉ. अजय जैन और जैन ENT हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सतीश जैन से बात की। उन्हीं के जवाबों से जानिए म्यूकोरमाइकोसिस के बारे में सबकुछ...

क्या है? आंंख की नसों के पास में फंगस जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटाइनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। इससे आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है।

क्यों? कोरोना में दिए जाने वाले स्टेरॉइड इम्युनिटी को और भी कम कर देते हैं। ऐसे में दवा का साइड इफेक्ट होने लगता है और व्यक्ति को म्यूकोरमाइकोसिस हो जाता है।

लक्षण? नाक खुश्क होती है। नाक की परत अंदर से सूखने लगती है व सुन्न हो जाती है। चेहरे व तलवे की त्वचा सुन्न हो जाती है। चेहरे पर सूजन आती है। दांत ढीले पड़ते हैं।

इलाज? इस फंगस व इंफेक्शन को रोकने के लिए एकमात्र इंजेक्शन लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी आता है। कीमत 5 हजार रुपए है। मरीज को 6 लगते हैं। यदि इंफेक्शन बढ़ जाए तो पहले ऑपरेशन कर नाक-आंख के बीच के गले हुए हिस्से को निकाला जाता है और फिर दवाएं चलती हैं। ऑपरेशन भी काफी जटिल होता है।

खतरा? सात से आठ दिन में ही इलाज न हो और फंगस न निकाला जाए तो ब्रेन तक फंगस इंफेक्शन फैलना तय है। इसके बाद व्यक्ति को बचाना लगभग नामुमकिन है।

बचाव? कम से कम 4-5 दिन बाद डायबिटीज पेशेंट का फीडबैक लेकर संतुलित मात्रा में स्टेरॉइड देने चाहिए। शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य हैं, लोग ध्यान नहीं देते।

म्यूकोरमाइकोसिस के 4 केस, सबक- लक्षण दिखने पर देरी बिल्कुल न करें

पहला केस दिल्ली का: 49 साल की मीना खंडेलवाल 10 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हो गईं। वे डायबिटिक थीं। कोरोना के इलाज के दौरान उन्हें उन्हें स्टेरॉइड दिए गए। उन्हें साइड इफेक्ट हो गया। चेहरे पर इतनी सूजन आ गई कि मॉस्क लगाना मुश्किल हो गया। 20 अप्रैल को जयपुर जैन ENT हॉस्पिटल आए। इलाज चला। पर एक आंख नहीं बच पाई।

दूसरा केस इटावा का: ताराचंद (46) डायबिटिक थे। 27 अप्रैल को संक्रमित हुए। स्टेराॅयड देने के कुछ ही दिन में साइड इफेक्ट आने लगे। इटावा के डॉक्टर्स ने जयपुर जाने को कहा। जैन ENT हॉस्पिटल में उनकी सर्जरी की गई, लेकिन देेरी की वजह से दोनों आंखें नहीं बचाई जा सकीं।

कोरोना संक्रमितों को मिलेगी राहत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी कोविड अस्पताल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा अवध शिल्पग्राम में शुरू कर दिया गया है। इस अस्पताल में मरीजों के भर्ती होने के लिए डीआरडीओ ने इस संबंध में मोबाइल नंबर और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जिससे मरीजों को भर्ती होने में कोई दिक्कत नहीं होगी। अभी तक इस अस्पताल में 73 कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती किया गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निर्देश पर, लखनऊ में 450 बेड से अधिक के अटल बिहारी वाजपेयी कोविद अस्पताल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा अवध शिल्पग्राम में रिकॉर्ड समय में स्थापित किया गया है। यह समर्पित पावर बैकअप और बायोमेडिकल और अन्य अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के अलावा निर्बाध आपूर्ति के लिए 20 KL ऑक्सीजन टैंक से लैस है। अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं होगा।

मरीजों को मुफ्त भोजन, ऑक्सीजन व्यवस्था दी जाएगी
डीआरडीओ के द्वारा स्थापित किया गया अस्थायी कोविड हॉस्पिटल में मरीजों को मुफ्त में भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा। यूपी सरकार की मदद से डीआरडीओ ने ऑक्सीजन और चिकित्सा आपूर्ति की व्यवस्था की है, जो नि: शुल्क दी जाएगी। DRDO और राज्य सरकार ने सुविधा के त्वरित संचालन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सभी प्रमुख पहलुओं को संभाल रहे हैं जैसे कि अस्पताल को चलाने के लिए आवश्यक सुविधाओं की आपूर्ति, ऑक्सीजन पुनः आपूर्ति, रोगी प्रबंधन और अपशिष्ट निपटान आदि को शामिल करने के लिए सेवा प्रबंधन।

कोरोना के आगे UP बोर्ड भी फेल:

UP बोर्ड के स्टूडेंट्स के लिए जरूरी खबर है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए UP बोर्ड की परीक्षाएं एक बार फिर से टल सकती हैं। मतलब मई में परीक्षाएं नहीं होंगी। सूत्रों के मुताबिक शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा से लेकर बोर्ड के कई अफसर तक कोरोना संक्रमित हैं। जब तक ये अफसर ठीक नहीं होते, तब तक परीक्षा की तारीखों पर कोई फैसला नहीं होगा। कोरोना से संक्रमित माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक विनय कुमार पांडेय ने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा, 'अभी प्रदेश में लॉकडाउन चल रहा है। हालात भी अभी सामान्य नहीं हैं, ऐसी स्थिति में मई में परीक्षा कराना संभव नहीं है।

10वीं की परीक्षा रद्द हो सकती है
यूपी बोर्ड भी CBSE की तर्ज पर 10वीं की परीक्षा रद्द कर सकता है। इसके बाद आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर छात्रों का रिजल्ट तैयार कर दिया जाएगा। अफसर इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। जल्द ही इसका ऐलान भी हो सकता है। वहीं, 12वीं के स्टूडेंट्स की परीक्षा जून या फिर जुलाई में कराने की तैयारी है।

दो बार टल चुकी है परीक्षा
बोर्ड इसके पहले भी दो बार परीक्षाओं को टाल चुका है। पहले ये परीक्षाएं 23 अप्रैल होनी थीं, लेकिन इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव कराने का आदेश दे दिया। इसके बाद परीक्षा की तारीख 8 मई से तय की गई, लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए फिर से इसे टाल दिया गया। बोर्ड ने कहा था कि 15 मई के बाद इस पर विचार किया जाएगा, लेकिन इस बीच उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा खुद संक्रमित हो गए। उनके पीए की मौत भी हो चुकी है। शिक्षा विभाग के कई अफसर भी संक्रमित हैं। हाल ही में अयोध्या के DIOS बी चौहान की भी कोरोना से मौत हो गई थी।

UP पंचायत चुनाव बना कोरोना स्प्रेडर:

उत्तर प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच हुए पंचायत चुनाव सरकारी कर्मचारियों की जान पर भारी पड़ गए। कई परिवारों से उनका सहारा छिन गया। किसी बच्चे से मां का आंचल तो किसी से पिता का साया छिन गया। इन चुनावों में संक्रमित हुए 2 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों की जान चली गई।

आंकड़ों को देखें तो कोरोना से 706 शिक्षकों की मौत तो मतगणना से पहले ही हो चुकी थी। मतगणना के बाद यह संख्या एक हजार के पार जाने की आशंका है। इसकी पुष्टि उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ और प्रदेश का बेसिक शिक्षा विभाग भी कर रहा है।

शिक्षक संघ ने CM को पत्र लिखकर मृतकों के नाम गिनाए
जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों उत्तर प्रदेशीय माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में मृतकों का जिक्र किया है। उन्होंने करीब 10 पन्नों की चिट्ठी के साथ 706 शिक्षकों की सूची भी जारी की है। इसमें जिलेवार मौतें और नाम दर्ज हैं। हालांकि पिछले एक सप्ताह में मृतकों की संख्या काफी बढ़ गई है। अब प्रदेश के सभी संगठन ऐसे कर्मचारियों के परिवारों को 50 लाख रुपए का मुआवजा दिलाने की मांग करने लगे हैं।

AIIMS की लोगों को सलाह:आप थक सकते हैं, पर वायरस नहीं इसलिए नियम मानिए; लक्षण दिखें तो 10 दिन होम आइसोलेशन में रहें

कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देशभर के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक सप्ताह से देश में मिलने वाले मरीजों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ रही है। बीते 24 घंटे में दुनिया में 8.92 लाख लोग कोरोना पॉजिटिव आए हैं। इनमें से 3.86 लाख भारत से हैं। इस बीच केंद्र सरकार और AIIMS के डायरेक्टर ने कोरोना पर सलाह दी है।

सरकार ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि लोगों को लगता है कि कोरोना एक स्कैम है और मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। लोगों को नियम मानने चाहिए, क्योंकि आप तो थक सकते हैं, लेकिव वायरस कभी नहीं थकता है। वहीं ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस दिल्ली (AIIMS) के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया होम आइसोलेशन के बारे में विस्तार से बताया।

होम आइसोलेशन में इन 8 नियमों का पालन करें

  • कोरोना मरीज को बीमारी के लक्षण आने के कम से कम 10 दिन बाद तक होम आइसोलेशन में रहना चाहिए।
  • होम आइसोलेशन से बाहर आने से 3 दिन पहले तक मरीज को बुखार नहीं आना चाहिए।
  • आइसोलेशन पीरियड खत्म होने के बाद मरीज को दोबारा कोरोना टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।
  • डॉक्टर की बताई दवाइयां लगातार लेते रहना चाहिए। बुखार, सर्दी और खांसी की दवाई भी लेते रहें।
  • दवाइयां लेने के बाद भी अगर बुखार ना जाए तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।
  • यदि सात दिनों तक बुखार और कफ कम ना हो तो डॉक्टर की सलाह पर लो डोज ओरल स्टेरॉइड लिया जा सकता है।
  • होम आइसोलेशन में रेमडेसिविर इंजेक्शन लेने की जरूरत नहीं है। इसे डॉक्टरों की निगरानी में दिया जाना चाहिए।
  • ऑक्सीजन लेवल कम हो या सांस लेने में परेशानी होने लगे तो डॉक्टर से फौरन संपर्क करना चाहिए।

24 घंटे में रिकॉर्ड 4 लाख केस आए, यह अमेरिका में मिले नए संक्रमितों का 7 गुना; कल महामारी से जान गंवाने वालों में हर चौथा भारतीय

देश में कोरोना की दूसरी लहर हर दिन खतरनाक होती जा रही है। शुक्रवार को यहां रिकॉर्ड 4 लाख 1 हजार 911 नए संक्रमितों की पहचान हुई। यह दुनिया के किसी भी देश में एक दिन में मिले संक्रमितों की सबसे बड़ी संख्या है। यही नहीं, यह आंकड़ा सबसे ज्यादा संक्रमित अमेरिका में मिले नए मरीजों से सात गुना है। वहां शुक्रवार को 58,700 केस आए। पूरी दुनिया में 8.66 लाख नए मरीजों की पहचान हुई है। इनमें से लगभग आधे (46%) भारत में ही पाए गए।

मौत के आंकड़ों की बात करें, तो दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें भी भारत में हो रही हैं। बीते दिन दुनिया में कोरोना से 14,285 लोगों की जान गई। इनमें 3,521 मौतें भारत में रिकॉर्ड की गई। यानी दुनिया में बीते 24 घंटे में हुई मौत में हर चौथी मौत भारत में हुई। यहां सबसे ज्यादा मौतें महाराष्ट्र में दर्ज की गई, जहां 828 संक्रमितों ने दम तोड़ दिया।

बंगाल में वोटिंग LIVE:35 सीटों पर 5.40 बजे तक 76% मतदान; उत्तर कोलकाता में ऑडिटोरियम के पास बम फेंका गया, चुनाव आयोग ने रिपोर्ट मांगीबंगाल में वोटिंग LIVE:35 सीटों पर 5.40 बजे तक 76% मतदान; उत्तर कोलकाता में ऑडिटोरियम के पास बम फेंका गया, चुनाव आयोग ने रि

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के 8वें और आखिरी चरण में 35 सीटों पर सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है। दोपहर 5.40 बजे तक यहां 76.07% मतदान हुआ है। इस फेज में 283 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। मुस्लिम बहुल आबादी वाले जिलों में सबकी नजर अल्पसंख्यक वोटों पर रहेगी। इस हिसाब से देखा जाए तो इस बार ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला रहने वाला है। पिछले सात फेज में TMC और भाजपा ही आमने-सामने रही हैं।

वोटिंग के बीच उत्तर कोलकाता महाजती सदन ऑडिटोरियम के पास बम फेंकने की घटना हुई है। चुनाव आयोग पर इसकी रिपोर्ट मांगी है।

सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की 753 कंपनियां
आठवें चरण में हिंसा रोकने के लिए चुनाव आयोग ने केंद्रीय सुरक्षाबल की 753 कंपनियां तैनात की हैं। सबसे ज्यादा हिंसा के लिए जाने जाने वाले बीरभूम, मुर्शिदाबाद और मालदा जिले में सबसे ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं। बीरभूम जिले में केंद्रीय सुरक्षाबलों की 224 कंपनियां तैनात की गई हैं। मुर्शिदाबाद में 212, मालदा में 110 और कोलकाता उत्तर में 95 कंपनियां तैनात की गई हैं।

11,860 बूथों पर 84.78 लाख वोटर डालेंगे वोट
इन 35 सीटों के उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 41 लाख 21 हजार 735 महिला मतदाताओं और 158 ट्रांसजेंडर मतदाताओं समेत कुल 84 लाख 77 हजार 728 मतदाता करेंगे। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 43 लाख 55 हजार 835 है। मतदान शाम साढ़े 6 बजे तक चलेगा। मतदान के लिए कुल 11,860 बूथ बनाए गए हैं। इनमें बीरभूम में 3908, मालदा में 2073, मुर्शिदाबाद में 3,796 और कोलकाता उत्तर में 2,083 मतदान केंद्र हैं।

सरकार का अहम फैसला:केंद्र ने 3 महीने के लिए वेंटिलेटर, ऑक्सीजन जेनेरेटर समेत 17 मेडिकल डिवाइस इंपोर्ट करने को मंजूरी दी;

सरकार ने जिन डिवाइसों को मंजूरी दी है, उनमें नेबुलाइजर्स, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स, CPAP डिवाइस, ऑक्सीजन कैनिस्टर, ऑक्सीजन जेनेरेटर और वेंटिलेटर्स जैसी जरूरी चीजें शामिल हैं। इससे कोरोना के खिलाफ चल रही लड़ाई में मदद मिलेगी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी।

1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स ऑर्डर किए गए
इससे पहले केंद्र सरकार ने PM केयर्स फंड से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स और 500 प्रेशर स्विंग एडसोर्पशन (PSA) ऑक्सीजन प्लांट खरीदने का फैसला किया था। PMO के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पहले से ही 713 PSA प्लांट के ऑर्डर दिए हुए हैं। बुधवार को फिर 500 प्लांट के नए ऑर्डर दिए गए।

अगले तीन महीने में होंगे तैयार
PSA प्लांट घरेलू मैन्यूफैक्चरर्स तैयार करेंगे। इन कंपनियों को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा विकसित तकनीक सौंपी जाएगी। DRDO अगले तीन महीने में इन्हें देशभर में लगाएगा।

महाराष्ट्र के बीड में एक एंबुलेंस में 22 बॉडी ठूंस दीं, श्मशान में एक चिता पर 3-3 शवों का अंतिम संस्कार किया

महाराष्ट्र के बीड जिले में कोरोना मरीजों के शव के साथ अमानवीयता की घटना सामने आई है। यहां एक एम्बुलेंस में 22 शवों को एक दूसरे के ऊपर रखकर शमशान लाया गया और फिर एक चिता पर 2 से 3 लाशों को रखकर अंतिम संस्कार किया गया।

घटना की तस्वीरें सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। बीड जिले के अंबाजोगाई में स्वामी रामानंद तीर्थ अस्पताल में रविवार रात तक कोरोना से 30 मरीजों की मौत हुई थी। इनमें से 22 शवों को एक ही एम्बुलेंस में शमशान लाया गया, बाकी के 8 शव दूसरी एंबुलेंस में लाए। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने हॉस्पिटल के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है।

अस्पताल ने सफाई में कहा है कि उनके पास दो ही एंबुलेंस हैं। उन्होंने पांच एंबुलेंस की और मांग की है। 17 मार्च को प्रशासन को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक एम्बुलेंस नहीं मिली हैं।

शवों के अंतिम संस्कार के लिए यह है प्रोटोकॉल

  • केंद्र के प्रोटोकॉल के मुताबिक कोरोना मरीज की मौत के 2 घंटे के अंदर शव को एक वाहन में प्रशिक्षित कर्मचारी प्लास्टिक बैग में रखकर शमशान ले जाएगा।
  • किसी को शव छूने की अनुमति नहीं होगी। अंतिम संस्कार में भीड़ पर भी रोक लगाई गई है। अंत्येष्टि के बाद सैनिटाइजेशन की व्यवस्था होगी।
  • मृतक के परिवार की मौजूदगी में 24 घंटे में अस्पताल को निगम की मदद से दाह संस्कार करवाना होगा।

प्रियंका गांधी का भावुक पोस्ट:भले ही इस देश पर शासन करने का पवित्र काम करने वालों ने लोगों को इस बड़े संकट में निराश किया हो, लेकिन हमें उम्मीद नहीं खोनी चाहिए

कोरोना संक्रमण से खराब होते हालात के बीच प्रियंका गांधी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर एक भावुक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने संक्रमण काल में लोगों की चिंताओं के साथ डॉक्टर और नर्सों की प्रशंसा की है।

प्रियंका ने इस विषम परिस्थिति में आम लोगों के प्रयासों की भी सराहना की। साथ ही सरकार की नाकामियों का जिक्र करते हुए हमला भी बोला।

प्यारे दोस्तों,

यह पोस्ट लिखते हुए मेरा दिल बहुत भारी है। मुझे पता है कि आप में से कई लोगों ने पिछले कुछ हफ्तों में अपने प्रियजनों को खो दिया है। कई परिवार के सदस्य हैं जो जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो अपने घर में इस महामारी से जूझ रहे हैं, वे आने वाले डर से चिंतित हैं। हममें से एक भी ऐसा नहीं है जो इस संकट से प्रभावित न हुआ हो। देशभर में लोग हवा के लिए हांफ रहे हैं, वे स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं या उन दवाओं के लिए जो उन्हें जीवन दे सकें।

इस महामारी में सरकार ने हम सबको विफल कर दिया है। यहां तक ​​कि हम में से जो लोग उनका विरोध करते हैं और उनसे लड़ते हैं, वे भी इस समय विनाशकारी होते नेतृत्व और शासन से उम्मीद खत्म नहीं कर सकते। पूरे दिल से, हम अभी भी उम्मीद कर रहे हैं कि वे उठेंगे और ऐसे कदम उठाएंगे जो जीवन बचाने के लिए जरूरी हैं। लेकिन भले ही इस देश पर शासन करने का पवित्र काम करने वालों ने लोगों को इस बड़े संकट में निराश किया हो, लेकिन हमें उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।

समय प्रतिकूल है और मानवीय चुनौती बढ़ गई है। भारत ने अतीत में बहुत दर्द और पीड़ा देखी है। हमने चक्रवात और सूखा, बड़े पैमाने पर भूकंप, अकाल और विनाशकारी बाढ़ का सामना किया है, फिर भी हमारी आत्मा नहीं टूटी है। हर बार हमने ऐसी आपदा का सामना किया है। आम लोग, आपके और मेरे जैसे लोग आगे आए हैं। मानवता ने हमें कभी असफल नहीं किया है।

देशभर में हमारे डॉक्टर, नर्स और हेल्थकेयर कर्मचारी जबरदस्त दबाव में काम कर रहे हैं। अपनी जान जोखिम में डालकर पीड़ित लोगों का इलाज कर रहे हैं। बिजनेस कम्यूनिटी अपने कोटे का ऑक्सीजन अस्पतालों को भेज रही है। प्रत्येक गांव, जिले, कस्बे और शहर में ऐसे संगठन और व्यक्ति हैं जो जो कुछ भी कर सकते हैं, वे उन लोगों की सहायता कर रहे हैं जो दर्द में हैं। यह बुनियादी अच्छाई हम में से हर एक के भीतर मौजूद है। किसी की पीड़ा के समय हमारा यही व्यवहार एक राष्ट्र को महान बनाता है।

यह हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ है जिसमें हमें अपने स्वयं के असीमित साहस को खोजने के लिए सभी सीमाओं से परे धकेलने के लिए कहा जा रहा है। हमें अपनी बेबसी और भय की भावनाओं को अलग करने और बहादुर बने रहने के लिए चुनौती दी जा रही है।

हम इस लड़ाई में एक हैं, भले ही हमारे धर्म, हमारी जाति, हमारा वर्ग या हममें कोई अन्य भेद हो। वायरस उन चीजों को नहीं पहचान पाता है। हमारी यही करुणा की भावना और लचीलापन दुनिया की नजरों में हमें भारतीय बनाता है। जीवन के इस चौराहे पर हम एक-दूसरे के सबसे मजबूत समर्थक होंगे।

निराशा के बीच अपनी ताकत को इकट्ठा करके जो कुछ भी हम दूसरों को सहयोग देने के लिए कर सकते हैं, वो हमें करना चाहिए। सभी बाधाओं को पार करने की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ यह समय भी एक दिन कट जाएगा।

हमारे चारों ओर जो अंधेरा है, इससे निकलकर एक बार फिर हम उजाले की ओर लौटेंगे।

-प्रियंका

पंजाब में सियासी खींचतान:

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को पटियाला से उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्होंने एक बयान जारी कर साफ किया कि पार्टी में अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

अमरिंदर ने कहा कि अगर नवजोत सिंह सिद्धू उनके खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं तो वह ऐसा करने के लिए आजाद हैं। उनका नसीब भी जनरल जेजे सिंह की तरह हो जाएगा। जनरल सिंह पिछले चुनाव में शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर अमरिंदर के खिलाफ लड़े थे, लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई थी।

अमरिंदर ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू साफ करें कि वह कांग्रेस के सदस्य हैं या नहीं। अगर है, तो मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ उनकी लगातार बयानबाजी अनुशासनहीनता मानी जाएगी। अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस के असंतुष्ट धड़े को अपना पक्ष चुन लेना चाहिए, क्योंकि वह पार्टी का अनुशासन तोड़ने में लगे हुए हैं। BJP उन्हें वापस नहीं ले जाएगी। जहां तक शिरोमणि अकाली दल का संबंध है, वे भी उनसे चिढ़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ की भी सराहना की और कहा कि उनके बाद वह अच्छा काम कर रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभा रहे हैं। इसलिए सिद्धू के सुनील जाखड़ की जगह नियुक्त होने का कोई सवाल ही नहीं है।

पूरी लड़ाई अध्यक्ष पद की अमरिंदर ने कहा कि सिद्धू को अभी कांग्रेस में आए 4 ही साल हुए हैं। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने युवा कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वे उनसे बहुत सीनियर हैं। इसलिए सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद कैसे दिया जा सकता है। कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और सुनील जाखड़ के इस्तीफे की पेशकश पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इसे खारिज कर दिया है।

अलग-अलग उम्र के लोगों पर वायरस का असर अलग-अलग है कोरोना गरीबों पर कम हमलावर:अपर मिडिल क्लास में 70% इंफेक्शन, लोअर मिडिल क्लास में 26% और बस्तियों में सिर्फ 4% संक्रमण

अमीरों की तुलना में कोरोना गरीबों पर कम असरदार है। अपर मिडिल क्लास के 70% लोग कोरोना का शिकार हो रहे हैं। लोअर मिडिल क्लास में 25.74% लोगों पर इसका असर है। इसके उलट बस्तियों में रहने वाले गरीब तबके के 4.26 प्रतिशत लोग ही कोरोना की चपेट में आए हैं। ये खुलासा गुजरात की सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी की रिसर्च में हुआ है। सर्वे में ये बात भी सामने आई है कि कोरोना लोगों की जीवनशैली के हिसाब से भी शरीर को नुकसान पहुंचाता है।

अलग-अलग उम्र के लोगों पर वायरस का असर अलग-अलग है। इसके अलावा महिला और पुरुष पर भी संक्रमण का प्रभाव अलग-अलग पड़ता है। रिसर्च सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेश जोगसणा के मार्गदर्शन में PHD स्टूडेंट निमिषा पडारिया ने किया है। रिसर्च में 720 कोरोना मरीजों पर स्टडी की गई।

पाैष्टिक आहार लेना जरूरी
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार जूरी है, लेकिन 21वीं सदी में लोग फास्ट फूड का सेवन ज्यादा कर रहे हैं। स्टडी में सामने आया है कि पाैष्टिक तत्व लेने पर कोरोना से रिकवरी तेजी से होती है। इसके लिए गेहूं, चावल, बाजरा, ज्वार, हरी-ताजी सब्जियों और फल पर्याप्त मात्रा में खाना चाहिए। इनसे कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फेट, विटामिन, मिनरल्स, फाइबर मिलता है। ये पाचनशक्ति और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।