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पंजाब सरकार की हठधर्मिता व राजस्थान सरकार की उदासीनता के कारण 10 जिलों के 2 करोड लोग दूषित जल पीने को मजबूर -पूनियां

ByRameshwar Lal

Jun 18, 2021

जयपुर टाइम्स

नई दिल्ली, 17 जून। पंजाब से राजस्थान में आ रहे दूषित पानी की समस्या के स्थाई समाधान हेतु नई दिल्ली में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र शेखावत के साथ जल शक्ति मंत्रालय की अहम बैठक में भाग लिया।गजेन्द्र सिंह, डॉ. पूनियां, अर्जुनराम मेघवाल, कैलाश चौधरी, बीकानेर संभाग के सभी सांसद, विधायक व पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों ने पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्थान के एसीएस से इस संबंध में विस्तार से चर्चा की है।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में डॉ. पूनियां ने कहा कि, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ सहित करीब 10 जिले सीधे तौर पर दूषित पानी से प्रभावित हैं। अफसोस इस बात का है पंजाब सरकार की इस ओर कोई रुचि नहीं थी, क्योंकि उनके अपने हिस्से का पानी मिल रहा है, लेकिन पंजाब से राजस्थान आ रहे दूषित पानी के कारण राजस्थान में कैंसर जैसी बीमारी के चपेट में काफी संख्या में लोग आ रहे हैं, जो लोगों के जीवन पर बड़ा संकट बन गया है, जो राज्य का गंभीर विषय है, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस बारे में समाधान को लेकर गंभीर नहीं हैं।

डॉ. पूनियां ने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वहां से पिछले दिनों प्रेस नोट जारी हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नहरों के सुदृणीकरण के लिये अच्छा कार्य किया है। लेकिन पंजाब से आ रहे दूषित पानी की रोकथाम के संबंध में राजस्थान सरकार की तरफ से कोई एक्शन व प्रगति नहीं होना, ये अफसोसजनक व चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि, 70 दिन की नहरबंदी के कारण पानी की क्राइसिस तो थी, फसलों के लिये भी बड़ा संकट खड़ा हुआ, ये काम पहले किया जा सकता था, दूषित पानी को चैनल किया जा सकता था।

डॉ. पूनियां का कहना है कि, जो रिपोर्ट पंजाब सरकार की तरफ से आई उसमें अफसोसजनक यह है कि जिन एसटीपी का निर्माण होना था, 2014 की पेंडेंसी अभी तक है, 2018 में एनजीटी में जो पिटीशन हुई उसमें 50 करोड़ का जुर्माना एनजीटी ने तय किया, उस जुर्माने के बाद भी पानी को प्रदूषित करने वाली इंडस्ट्रीज बंद नहीं हुई।

उन्होंने बताया कि, आज जो बैठक में बात हुई उसमें तय हुआ कि केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड सैंपलिंग का कार्य करेगा, सैंपलिंग से पानी को प्रदूषित करने वाली इंडस्ट्रीज को आइडेंटीफाइ कर उचित कार्यवाही करेगा, सभी जनप्रतिनिधियों की मांग थी कि भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड में राजस्थान का पानी में 50 प्रतिशत हिस्सा है, उसमें प्रदेश का कोई प्रतिनिधि नहीं है, जो आश्चर्यजनक बात है, इसमें राजस्थान का प्रतिनिधित्व हो, जिससे मुखर तरीके से राजस्थान की बात रखी जा सके।

डॉ. पूनियां ने कहा कि, इस चर्चा को 15 दिन के बाद फिर रिव्यू करेंगे, काफी अरसे बाद सार्थक दिशा में चर्चा हुई, इससे पहले भी केन्द्र की मोदी सरकार सार्थक प्रयास कर रही है, लेकिन पंजाब सरकार की हठधर्मिता व राजस्थान सरकार की उदासीनता के चलते दूषित पानी से चुनौतीपूर्ण एवं संकट की स्थित बनी हुई है। आज एक शुरुआत हुई है, मुझे पूरी उम्मीद है 15 दिन बाद इसका रिव्यू होगा, उसके बाद जो कार्यवाही शुरू होगी उससे निश्चित रूप से पंजाब व राजस्थान की कांग्रेस सरकारों पर नैतिक रूप से दवाब बढ़ेगा, जिससे करीब 10 जिलों के 2 करोड़ लोगों को दूषित पानी से निजात मिल सकेगी।

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