• Tue. Sep 27th, 2022

बिजली विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए खातों की पब्लिक ऑडिटिंग करे -मीना

ByKhushbu Jain

Jul 7, 2021

राजगढ़देश में सबसे कम आय वर्ग वाले राज्य में सबसे महंगी बिजली देने कोरोना लॉकडाउन अवधि के बिजली बिल माफ नहीं करने के विरोध में आम आदमी पार्टी ने बुधवार को राज्य सरकार की आम आदमी विरोधी नीतियों के खिलाफ बिजली महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार सत्ताधारी पार्टी व बिजली कंपनियों की मिलीभगत से जनता से बिजली के नाम पर गैर वाजिब वसूली रोके जाने के लिए मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम राजगढ़ को ज्ञापन दिया आम आदमी पार्टी अलवर जिला अध्यक्ष महेन्द्र मीना ने बताया कि आम आदमी पार्टी की ओर से सरकार से मांग रखी गई है कि बिजली महकमे में व बिजली कंपनियों के खातों का जनता द्वारा सोशल ऑडिट होना चाहिए जनता को शक है कि इसमें नाजायज वसूली की जा रही है राजस्थान की बिजली दरें देश के अन्य किसी राज्य के मुकाबले बहुत ऊंची है जबकि राजस्थान सस्ती व ज्यादा बिजली उत्पादन के लिए जाना जाता है राजस्थान के लोगों की आय दूसरे राज्य के मुकाबले बहुत कम है यहां बिजली की दरें कम होनी चाहिए जनता को राहत मिलनी चाहिए लेकिन उल्टे राजस्थान की सरकार ज्यादा वसूली कर के जनता के साथ क्रूरता दिखा रही है आम आदमी पार्टी मांग करती है कि कोरोना लॉकडाउन अवधि के बिजली बिल माफ किया जाना चाहिए क्योंकि इस अवधि में लोग बेरोजगार रहे हैं कमाई के साधन घट गए हैं 200 यूनिट तक बिजली फ्री की जानी चाहिए ताकि इससे गरीब जनता को राहत मिल सके और सरकार को चाहिए कि बेकाबू बिजली छीजत यानी चोरी पर भी नियंत्रण किया जाए राजस्थान की बिजली दरें ₹7 प्रति यूनिट से ज्यादा है अन्य शुल्क ,चार्जेज व स्थाई शुल्क को जोड़ दें तो ₹12 से भी ज्यादा हो जाती है राजस्थान अकेला राज्य है जहां हर तरीके से बिजली पैदा की जाती है जैसे पनबिजली, कोयला , गैस ,एटॉमिक विंड और सौर ऊर्जा आदि सभी तरीके के सस्ती बिजली उत्पादन होता है इसके बावजूद भी आम आदमी अन्य राज्यों की तुलना में अधिक भुगतान करता है दूसरे राज्य राजस्थान से बिजली खरीद कर अपने उपभोक्ताओं को राजस्थान से सस्ती बिजली देते हैं ऐसे कैसे हो रहा है सरकार को इसका जवाब ढूंढना जरूरी है आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि बिजली कंपनियां और राज्य सरकार के बीच सांठगांठ है जिसके तहत बिजली कंपनियां अपने खातों में ऊंची दरों पर बिजली खरीद दिखाती है बिजली की चोरी और दूसरे तरीके से भारी बनावटी घाटा दिखाती हैं उसका आधार पर राज्य सरकार बिजली की दर बढ़ाने की अनुमति दे जाता है और जो वसूली होती है उसमें बंदरबांट की जाती है इसी तरह छीजत के नाम पर बड़े बड़े कारखानों को अवैध तरीके से बिजली चोरी कराई जाती है और उसकी वसूली एक आम आदमी से वसूली जाती है एक इमानदार आदमी को चोरी का नाम देखकर जालसाजी करते हैं। महेन्द्र मीना ने कहा कि प्रदेश की सरकार अगर इमानदार है तो राज्य के ऊर्जा विभाग, बिजली कंपनियों के सोशल ऑडिट करवाए वही मीना ने 11 मांगे रखी बिजली उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली दरें और कंपनी की बिजली खरीदने दरें दूसरे राज्य के मुकाबले ज्यादा क्यों है ? पांच तरह के अनावश्यक ( स्थाई शुल्क ,फ्यूल चार्ज ,विद्युत शुल्क ,नगरीय उपकर वअन्य शुल्क) की वसूली क्यों की जाती है ? अत्यधिक विद्युत चीज़ व विद्युत चोरी रोकने में असफलता का भार आम आदमी पर क्यों डाला जाता है ?विद्युत लाइन मेंटेनेंस में आवश्यक भुगतान क्यों स्टाफ होते हुए ठेकेदारों से काम करना कहां तक उचित है? कृषि व्यवसायिक और साधारण नए कनेक्शन या रिकनेक्शन में भ्रष्टाचार और ज्यादा चार्जेज क्यों वसूले जाते हैं? पुराने विद्युत लाइनों के बदलने व ट्रांसफार्मर लगाने में ठेकेदारों के साथ मिलीभगत से घोटाला क्यों होता है ? नई विद्युत लाइनें बिछाने का खर्च तो जोड़ दिया जाता है किंतु पुरानी एलुमिनियम तार व पुराने लोहे के खंभों के बेचने से होने वाले आय खातों मे नरादर रहती है ऐसा क्यों ? आम जनता से मिलने वाली सौर ऊर्जा की बिजली का कोई भुगतान नहीं करना होता इसके बावजूद घाटा कम क्यों नहीं हो रहा है? आम जनता से वर्ष 2017-18 व 3018-19में अतिरिक्त जमानत राशि वसूल की गई फिर भी महकमे का घाटा ज्यों का त्यों क्यों है ? बिजली कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट में घाटा होने के कारण उपरोक्त सभी बिंदुओं पर विस्तृत विवरण क्यों नहीं बताया जाता ? बिजली चोरी व खरीद घोटाले के लिए जिम्मेदार अधिकारीयो /कर्मचारीयों की आई व संपत्ति की जांच क्यों नहीं होती? वही आम आदमी पार्टी की मांग है कि बिजली कंपनियों के घाटे वितरण कारणों के साथ-साथ ऑडिटर को उपलब्ध कराते हुए सामाजिक अंकेक्षण की अनुमति दें महेन्द्र मीना ने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य सरकार और ऊर्जा विभाग यह मांग पत्र मिलने के 15 दिन में अगर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाता है तो आम आदमी पार्टी बिजली विभाग के गैर वाजिब वसूली और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ जनता के बीच में जाएगी और बिल भुगतान बहिष्कार , काटे गए कनेक्शनों जनता द्वारा सीधे चालू करने तथा धरना प्रदर्शन जैसे कदम उठाने को मजबूर होगी जिसकी जिम्मेदार पूरी तरह से राज्य सरकार होगी