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तारानगर में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया

ByRameshwar Lal

Aug 23, 2022

तारानगर

स्थानीय श्री बनेचंद सरावगी उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर एवं जगन्नाथ कंदोई बालिका आदर्श विद्या मंदिर के संयुक्त तत्वाधान में आज आजादी का अमृत महोत्सव वैद्य सत्यवीर सिंह की अध्यक्षता में मनाया गया राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जयपुर प्रांत शारीरिक शिक्षण प्रमुख प्रचारक मोहन सिंह ने कहा कि स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के अवसर पर हम स्व पर आधारित जीवन दृष्टि को पुनः स्थापित करने हेतु प्रतिबद्ध हों तथा भारतीय स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर बढे
स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता थी कि यह केवल राजनैतिक नहीं अपितु राष्ट्र जीवन के सभी आयामों तथा समाज के सभी वर्गों के सहयोग से हुआ एक सामाजिक सांस्कृतिक आंदोलन था इसे स्वतंत्रता आंदोलन को राष्ट्र के मूल अधिष्ठान यानी राष्ट्रीय स्व को उजागर करने के निरंतर प्रयास के रूप में देखना प्रासंगिक होगा
अंग्रेजों ने भारतीयों के एकत्व की मूल भावना पर आघात करके मातृभूमि के साथ उनके भावनात्मक एवं आध्यात्मिक संबंधों को दुर्बल करने का षड्यंत्र किया उन्होंने हमारी स्वदेशी अर्थव्यवस्था राजनीतिक व्यवस्था आस्था विश्वास और शिक्षा प्रणाली पर प्रहार कर उसे आधारित तंत्र को सदा के लिए भी नष्ट करने का भी प्रयास किया
स्वाधीनता की 75 वीं वर्षगांठ भारतीय समाज को एक राष्ट्र के रूप में सूत्रबद्ध रखने और राष्ट्र को भविष्य के संकटों से सुरक्षित करने के लिए स्व पर आधारित जीवन दृष्टि को दृढ़ संकल्प के साथ पुनः स्थापित करने की दिशा में पूर्ण प्रतिबद्ध होने का अवसर उपलब्ध कराती है
स्वराज 75 का उद्देश्य इतिहास को सत्य परिपेक्ष में रखना मात्र नहीं है भविष्य के भारत का स्वपन भी इससे जुड़ा है और भविष्य में जैसा भारत हम देखना चाहते हैं उसका बीज वपन तथा पौध संवर्धन आज करना होगा 25 वर्ष उपरांत जब हम आफ़ताब भी मनाए तब स्वाधीनता के अधिष्ठान पर स्वतंत्र की स्थापना हो जाए आज का शिशु उस समय राष्ट्र निर्माण की प्रमुख भूमिका में होगा आज का शिशु देश का भविष्य नहीं वर्तमान है क्योंकि उसका वर्तमान जिन संकल्पों से पोषित होगा वैसा भविष्य का भारत होगा आज का युवक उसे समय प्रौढ मार्गदर्शक की भूमिका में होगा इस पीढी को हमें चार प्रकार से तैयार करना है
भारत को मानो
भारत को जानो
भारत के बनों
भारत को बनाओ
आज के भारत को आत्म विस्मृति के गर्त से निकालकर स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर ले जाने के उपरोक्त 4 सोपानों की यात्रा का पाथेय है अधोलिखित पंचामृत का सेवन
पूर्वजों के कर्तव्य का स्मरण
पूर्वजों के संकल्पों का स्मरण
सनातन भारत की झलक
आधुनिक भारत की चमक तथा
अपने स्वयं के आधार पर भविष्य के भारत का संकल्प
स्वराज 75 के इस अवसर पर, भारतीय सर्व समावेशी जीवन दर्शन की पुन: स्वीकृति हेतु स्वात्म बोध जागरण कर देश काल परिस्थिति के अनुसार भाष्य करते हुए धार्मिक ,सामाजिक,सांस्कृतिक ,राजनीतिक,आर्थिक,शैक्षिक साहित्य कला अर्थात जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यवस्थाओं का स्वदेशी विकल्प खड़ा कर भारतीय चिंतन केंद्रीय तंत्र को पुष्ट करना वास्तव में स्वतंत्रता (स्व आधारित तंत्र) है अत:आज स्वराज 75 के अवसर का यह संकल्प है कि हमें स्वाधीनता से स्वतंत्रता की यात्रा 25 वर्ष में पूरी करनी है
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य किशनलाल शर्मा,संजय सरस्वत,राकेश शर्मा, बनवारीलाल,तेजाराम,ऋषि नंदन भार्गव,सहित विद्यालय के आचार्य दीदी एवं छात्र छात्राए उपस्थित थे।