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हाल है अतिक्रमण* *शहर में जगह-जगह अव्यवस्था का आलम* *केवल चालान काटने तक रह गया है काम

ByKhushbu Jain

Jul 8, 2021

सीकर। सच्चानन्द थधानी ।* शहर में हम जाने ट्रेफिक व्यवस्था का आलम तो यह पिछले एक दो महिने से यह व्यवस्था एक ऐसी व्यवस्था बन कर रह गई है, जो हर व्यक्ति, हर आने जाने वाले को तो दिखाई देती है, लेकिन सम्बिन्धित विभाग यातायात पुलिस को यह दिखाई नहीं देती उसने इस बाबत कुम्भकर्ण की नींद का आनन्द लेते हुऐ पूरी तरह आँखे मुंद रखी है। जगह-जगह अस्थाई अतिक्रमण का बोलबाल, जगह-जगह वाहनों का रैलो जो आड़े, टेडे, तिरछे हर जगह हमको खड़े दिखाई देंगेे वही चाहे कुछ दुकानदार हो या कुछ बैंको के बाहर का नजारा देखे कुछ नर्सिग होम देखे या प्राईवेट वाहन जो चलते है। उनके स्टेण्ड देखे, या अन्य सब जगह पोपा बाई के राज की तरह यह सब हो रहा है, या यूँ कहे शहर के मुख्य बाजार, मुख्य सड़के, मुख्य स्टेण्ड या मुख्य जगह नाथी की बाड़े के समान बनकर रह गया है। वहीं हम जाने ट्रेफिक पुलिस का हाल तो पिछले कुछ समय से इन्होंने अपना सारा ध्यान ट्रेफिक व्यवस्था से हटाकर चालान की तरफ कर लिया है, हर जगह पोईन्ट पर ट्रेफिक पुलिस के जवान तो मिल जायेंगे लेकिन वो ट्रेफिक व्यवस्था को सुधारने के बजाय केवल अपना वो लक्ष्य साधने में लग गये है जिनकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। वह भी चालान ऐसे जो केवल दुपहिया वाहन चालकों के ज्यादा बनाये जा रहे है। बड़ी-बड़ी गाडिय़ा भले ही बिना सीट बेल्ट के चले, वाहन चालक मोबाईल पर बात करते चले या गाड़ी पर काली फिल्म लगी हो या अन्य ट्रेफिक नियम तोड़ते हो लेकिन उन सब उनकी नजर नहीं जाती केवल दुपहिया वाहन चालकों पर उनकी नजर अर्जुन के तीर के समान ऐसे पहुँच जाती है कि आ गया शिकारी यह मछली की आँख है, उसका कारण यह भी है कि दुपहिया वाहन चालक जब बगैर हेलमेट के आता है तो उसका सिर का ताज दूर से ही नजर आने लगता है कि उसने सिर का ताज सजाया है कि नहीं या उसके साथ कितने जने है। नम्बर है कि नहीं, उसने दुपहिया वाहन को लोडिंग वाहन बना रखा है। बगैरह-बगैरह वहीं शहर में जिन-जिन स्थानों पर बन वे पर हमको कहीं पर भी ट्रेफिक पुलिस के जवान दिखाई नहीं देंगे। हम उदाहरण सूजरपोल गेट, वह चांदपोल गेट का वह अजमेर बस स्टेण्ड का तो यहां पर पहले वन वे की पालना करवाने के लिये ट्रेफिक पुलिस के जवान हमेशा तत्तपर रहते थे लेकिन पुराने साहब के जाने के पश्चात नये साहब के आने के पश्चात यह नियम बदल गये है। वहीं पर भी ट्रेफिक व्यवस्था को सही करवाने के लिये जवान नजर नहीं आयेंगे तो चालान काटने के लिये अगर इनको ट्रेफिक पुलिस न कहके चालान पुलिस कहे तो इसमें कोई हर्ज नहीं होगा। हम याद करे जनवरी २०२१ का महिना जब पुलिस कप्तान पैदल ही शहर के भ्रमण पर निकले तो पुलिस कप्तान ने पाया कि हर जगह ट्रेफिक की अव्यवस्था का बोलबाला है। हर जगह स्थिति इस बाबत चरमराई हुई है, उसके पश्चात उन्होंने उस वक्त के ट्रेफिक व्यवस्था को सुधारने के तब से लेकर उनके दूसरी जगह स्थानान्तरण होने तक ट्रेफिक व्यवस्था बिल्कुल सही चल रही थी। वे मुख्य बाजारों में दिनभर राउण्ड लगाकर सारी व्यवस्थायें खुद देख रहे थे पर अब देखे तो सारा मामला ही डाम डोल कहीं किसी को कुछ कहने वाला रोकने वाला टोकने वाला नहीं है। हा अगर बात चालान की आये तो फिर देखे इनका कमाल क्या वजह है कि ट्रेफिक पुलिस की गाड़ी पटरी से उतरकर अपना लक्ष्य कहीं और छोड़ भटक गई है। वहीं हम देखे कुछ ट्रांसपोर्ट वाले कुछ बड़े व्यापारी या कुछ निजी बस वाहन चालक कुछ ओवरलोडिंग गाडिय़ा अगर आपको नो एन्ट्री में दिखाई दे तो आश्चर्य मत करना क्योंकि यह ऐसा प्रेम है जो उनकी आँखे इस और मुदने को मजबूर कर देता है। लेकिन जो भी हो इस वक्त का नजारा मुख्य बाजारों का देखने लायक है कि किस तरह हम वापस ट्रेफिक की अव्यवस्थाओं से रूबरू हो रहे है।*- हमारे पास स्टॉक की कमी* टे्रफिक पुलिस भले ही शहर में जो अतिक्रमण का आलम चल रहा है उसे लेकर वो बहुत ही सजग व साफ शब्दों में जवाब देती है कि हमारे पास वन-वे पर खड़े करने के लिये व उसकी पालना करवाने के लिये पर्याप्त स्टॉफ नहीं है। यह तो कहना है सूरजपोल गेट के पास खड़े होने वाले ट्रेफिक कर्मी का जबकि हमने देखा इससे पूर्व जो ट्रेफिक इंचार्ज थे वे भी इन्हीं स्टॉफ के साथ जो कार्य कर रहे थे व बड़ा ही सराहनीय था। अब एकदम से मामला पूरी तरह कैसे बदल गया। एक एक जगह दो या तीन या चार जवान एक साथ दिखाई देंगे।

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