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कुई से शव निकालने के लिए आठवें दिन एनडीआरएफ व आर्मी ने संभाला मोर्चा, बंद किया पुराना गड्ढ़ा बाहर से मंगाई गई मशीनें

ByKhushbu Jain

Jun 30, 2021

सीकर. राजस्थान के सीकर जिले के कोलिड़ा गांव में गटर की कुई में धंसे मजदूर मनरूप के शव को मंगलवार को आठवें दिन भी नहीं निकाला जा सका है। स्थानीय प्रशासन व एसडीआरएफ को सात दिन में कामयाबी नहीं मिलने पर अब एनडीआरएफ व आर्मी सहित कई विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया है। जिन्होंने मौके पर पहुंचते ही मोर्चा संभाल लिया है। टीम ने नई योजना के तहत पुराने गड्ढे को भरकर नए सिरे से ऑपरेशन चलाने की कवायद की शुरू की है। जिसके लिए पायलिंग सहित कई मशीनों को मंगाया गया है। और उन्होंने अपना प्रयास शुरू भी कर दिया उम्मीद है कि अब जल्द ही शव को बाहर निकाला जा सकेगा। समाचार लिखे जाने तक जिसकी ऑपरेशन जारी थामनरूप का शव करीब 45 फिट नीचे दबा हुआ है। उसे निकालने के लिए प्रशासन की ओर पिछले आठ दिन से ऑपरेशन चलाया जा रहा है। लेकिन सिविल डिफेंस, एसडीआरएफ, नगर परिषद व क्षेत्र के जुगाड़ू लोगों की ओर से किए जा रहे सभी प्रयास रविवार तड़के साढ़े तीन बजे बंद हो गए। इसकी वजह थी नरम मिट्टी। शव तक पहुंचने के लिए एलएनटी और जेसीबी के माध्यम से करीब 30 फिट गहरा गड्ढ़ा खोद लिया गया। लगातार धंस रही मिट्टी को देखते हुए सीमेंट के पाइप डाले गए, लेकिन पाइप शव के करीब नहीं पहुंच सके। ऐसे में रात को ऑपरेशन बंद करना पड़ा।हुनरसे बनाई पहचान, उसी ने ली जानकोलीड़ा गांव के ही निवासी मनरूप की गटर की कुई खोदने के हुनर से अलग ही पहचान थी। वह अपने काम का इतना हूनर मंद था कि लोग उसका एक माह तक इंतजार करते थे। वह एक दिन में 40 से 50 फिट गहरी कुई खोद देता था। लेकिन किसी को क्या पता था कि उसका यह ही हुनर उसकी जान ले लेगा। गांव के गंगाधर बुडानिया के खेत में भी वह 22 जून मंगलवार को कुई खोदने आया था। गलती यह रहीं कि नए मकान के पास पहले से बनी कुई के पास ही दूसरी कुई की खुदाई शुरू कर दी गई। ग्रामीणों ने बताया कि मनरूप करीब 45 फिट कुई खोद चुका था। इसी दौरान नरम होने के कारण मिट्टी धंसने लगी। मनरूप ने बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन वह पैरों के निशान बनाकर बाहर नहीं निकल पाया। उसने बाहर काम कर रहे मजदूरों को उसे बाहर निकालने के लिए कहा। उसने अपनी कमर से रस्सी भी बांध ली, लेकिन जब उसे बाहर निकालने के लिए रस्सी खींची गई तो वह रस्सी टूट गई। इसी दौरान पास ही बनी भरी हुई कुई का पानी वहां आ गया। वह दस मिनट तक बचाने के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन बाहर निकालने में सफलता नहीं मिल पाई।पहले दिन पहुंचे पास, फिर मिट्टी ने तोड़ी आसगटर की कुई में मनरूप के दबने की सूचना से पहली रात ही ग्रामीणों और सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। सिविल डिफेंस और क्षेत्रीय लोगों ने ऑपरेशन भी शुरू किया। सिविल डिफेंस का कैलाश टिन सैट से मिट्टी को रोकर मनरूप के पास तक पहुंच गया। उसने पहले से बंधी रस्सी के दूसरी रस्सी भी बांध दी, लेकिन मिट्टी धंसने से मनरूप को बाहर नहीं निकाला जा सका। इसके बाद पास में दूसरा गड्ढ़ा खोदकर फर्मों के सहारे भी टीम उस तक पहुंची, लेकिन यहां भी सफलता में मिट्टी बाधा बन गई। इसके बाद प्रशासन ने दो एलनटी, पांच जेसीबी सहित अन्य संशाधन मंगवा कर मिट्टी की चौड़ाई में गहरी खुदाई शुरू की। 30 फिट से अधिक गहरा और 50 फिट से अधिक गहरा गड्ढ़ा खोद लिया गया। सेटरिंग की प्लेटों को बलियों के सहारे मिट्टी को रोकने का प्रयास किया गया। लेकिन मिट्टी धंसने से प्लेटे भी दब गई। ऐसे में यहां पर खुदाई बड़ी समस्या बन गई।खेत का खुला मैदान, खतरे में मकानकोलीड़ा गांव में चल रहे रेसक्यू ऑपरेशन में बड़ी बाधा गंगाधर बुडानिया का मकान भी बन रहा है। एक तरफ खेत का खुला मैदान है, लेकिन दूसरी तरह करीब 15 फिट की दूरी पर ही बुडानिया परिवार का नया मकान है। प्रशासन ने वहां बने शौचालय और फूस रखने के मकानों को तोड़ दिया है, लेकिन मकान को बचाने के प्रयास के चलते खुदाई एक तरफ ही की गई।

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