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दुबई का सुख-सुविधाओं भरा जीवन छोड़ समाज सेवा में जुटीं अनीता पूनिया, ‘शिक्षा सेवा प्रवण पुरस्कार’ से होंगी सम्मानित

द्वारा Jaipur Times
दुबई का सुख-सुविधाओं भरा जीवन छोड़ समाज सेवा में जुटीं अनीता पूनिया, ‘शिक्षा सेवा प्रवण पुरस्कार’ से होंगी सम्मानित


झुंझुनूं/जयपुर। झुंझुनूं जिले के चिड़ावा की निवासी अनीता पूनिया ने समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। कभी दुबई में सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन जीने वाली अनीता ने अपने देश और समाज के लिए कुछ करने की चाह में भारत लौटकर जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी फैलाने का संकल्प लिया।
भारत लौटने के बाद जब उन्होंने चिड़ावा की सड़कों पर कचरा बीनते और भीख मांगते मासूम बच्चों को देखा तो उनका मन द्रवित हो उठा। इसी अनुभव ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी और उन्होंने चिड़ावा के बाई रोड क्षेत्र में ‘सरला पाठशाला’ की स्थापना की। उनका उद्देश्य उन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना था, जो अभाव और मजबूरी के कारण विद्यालय से दूर थे।
97 बच्चों के जीवन में जगाई शिक्षा की अलख
शुरुआती दौर में अनीता पूनिया को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आर्थिक संसाधनों की कमी और समाज की उदासीनता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। पति विकास पूनिया और परिवार के सहयोग से उन्होंने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, ड्रेस, पुस्तकें और भोजन उपलब्ध कराना शुरू किया।
आज सरला पाठशाला के माध्यम से करीब 97 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। यहां बच्चों को केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि विज्ञान, गणित, भाषा और नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा दी जाती है। उनके प्रयासों से झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले परिवारों की शिक्षा के प्रति सोच में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
‘टीचर दीदी’ के नाम से पहचान
अनीता पूनिया की निस्वार्थ सेवा और समर्पण के कारण क्षेत्र के लोग उन्हें प्यार और सम्मान से ‘टीचर दीदी’ कहकर पुकारते हैं। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाते हुए कई बच्चों के भविष्य को नई दिशा दी है।
जयपुर में होगा सम्मान
शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें ‘शिक्षा सेवा प्रवण पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में आयोजित ‘अखिल भारतीय संस्कृत विद्वत सम्मान एवं विशिष्ट व्याख्यान समारोह’ में प्रदान किया जाएगा। यह कार्यक्रम संस्कृत के प्रख्यात विद्वान एवं राष्ट्रपति सम्मानित स्वर्गीय आचार्य पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री की पुण्य स्मृति में आयोजित किया जा रहा है।
अनीता पूनिया की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, सेवा भावना और समर्पण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

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